नागराकाटा : डायना रेंज के वनकर्मियों की निगरानी के बीच इन दिनों लगभग प्रतिदिन हाथियों के झुंड रेल लाइन पार कर रहे हैं। डायना जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहे हाथियों को लेकर वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। झुंड में कई शावक भी शामिल हैं, जिन्हें रेल लाइन के साथ-साथ 17 नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग पार कराना वनकर्मियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
वन विभाग की परेशानी चार दलछुट हाथियों ने और बढ़ा दी है। झुंड के साथ रहने के बावजूद ये हाथी अचानक अलग होकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। अलग-अलग स्थानों पर पहुंचने वाले इन दंतैल और माकना हाथियों को सुरक्षित तरीके से वापस जंगल की ओर भेजने में वनकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। डायना रेंज के रेंजर साम्य राय ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। हाथी और इंसान दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, फिलहाल डायना जंगल में करीब 50 हाथी मौजूद हैं। ये कई झुंडों में बंटकर लालबस्ती, रेड बैंक चाय बागान, लुकसान चाय बागान की 9 नंबर लाइन, नैनिताल-भूटान, अपर केलाबाड़ी बस्ती और हृदयपुर बस्ती समेत आसपास के विभिन्न इलाकों में पहुंच रहे हैं।
शनिवार रात करीब 10 हाथियों का झुंड लालबस्ती पहुंचा था। जंगल की ओर लौटते समय धरणीपुर चाय बागान के पानीघट्टा लाइन स्थित चाय सुंदरी परियोजना के सामने झुंड रुक गया। पहले से निगरानी कर रहे वनकर्मियों ने लगातार पहरा देते हुए हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर रवाना किया।
हाथियों के लौटने वाले रास्ते में रेल लाइन और 17 नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग दोनों पड़ते हैं। वन विभाग ने कैरन स्टेशन को भी हाथियों के जंगल की ओर बढ़ने की सूचना दी। वनकर्मी पूरे रास्ते झुंड के साथ चलते रहे और पहले रेल लाइन तथा उसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पार कराकर हाथियों को सुरक्षित जंगल तक पहुंचाया।
शनिवार को भी वनकर्मियों ने भूटान से लौटे हाथियों के झुंड को सुरक्षित रास्ता दिखाते हुए ग्रासमोड़ चाय बागान के चार नंबर गेट से डायना जंगल तक पहुंचाया था।
वन विभाग के अनुसार, पिछले करीब एक महीने से डुआर्स में दलछुट हाथियों की गतिविधियां बढ़ी हैं। ये हाथी 15 से 20 मिनट के अंतराल पर अलग-अलग स्थानों में प्रवेश कर रहे हैं। विशाल क्षेत्र में लगातार बदलते ठिकानों का पहले से अनुमान लगाना वनकर्मियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
इसी बीच रविवार को मोराघाट जंगल में दो दलछुट हाथियों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें एक हाथी की मौत हो गई। वन विभाग का प्राथमिक अनुमान है कि मादा हाथी के झुंड पर अधिकार को लेकर दोनों हाथियों के बीच संघर्ष हुआ।