मिरिक: गोरखा यूथ एक्टिविस्ट नेटवर्क (ज्ञान) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से स्थायी राजनीतिक समाधान (पीपीएस) प्रक्रिया का वास्तविक उद्देश्य, संवैधानिक दायरा और कार्यक्षेत्र स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन ने सवाल उठाया है कि 22 अगस्त 2026 को गठित ड्राफ्टिंग कमेटी को अलग गोरखालैंड राज्य की मांग पर विचार करने का अधिकार दिया गया है या पश्चिम बंगाल के भीतर कोई वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में ज्ञान के मुख्य समन्वयक एवं अधिवक्ता बीरेंद्र रसाइली ने कमेटी का पूरा टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर), गठन संबंधी आधिकारिक आदेश, सदस्यों की सूची, अधिकार, कार्यकाल और रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा सार्वजनिक करने की मांग की है।
संगठन के अनुसार, स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, तराई और डूवर्स के हितधारक वास्तविक उद्देश्य जाने बिना अपने सुझाव और प्रस्ताव जमा कर रहे हैं।
ज्ञान ने पूर्व इंटरलोक्यूटर पंकज कुमार सिंह के कार्यकाल, रिपोर्ट और वर्तमान कमेटी से उनके संबंधों पर भी स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही प्रस्तावित राजनीतिक व्यवस्था के भौगोलिक दायरे को स्पष्ट करने की मांग की है।
संगठन ने कहा कि गोरखाओं की मूल राजनीतिक मांग और प्रस्तावित समाधान की प्रकृति स्पष्ट होने के बाद ही आगे कोई नया ड्राफ्ट या सुझाव जमा किया जाना चाहिए।