Migratory birds at Fulbari Barrage- 
सिलीगुड़ी

फूलबाड़ी बैराज रंगीन प्रवासी पक्षियों से गुलजार

सर्दी आने से पहले ही प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा, स्थानीयों में खुशी और उत्साह की लहर

सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल में अभी तक ठंड ने पूरी तरह से दस्तक नहीं दी है, लेकिन मौसम के इस अनिश्चित दौर में भी फूलबाड़ी के महानंदा बैराज का जलाशय मानो प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग बन गया है। जलाशय के शांत पानी पर इन दिनों रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट गूंज रही है। सुबह की पहली किरणों से लेकर शाम की गुलाबी धूप तक परिंदों के झुंड का आना-जाना लगातार जारी है, जिसने पूरे इलाके के वातावरण को जीवंत बना दिया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस बार ठंड की शुरुआत देर से हो रही है, फिर भी प्रवासी पक्षियों का समय से पहले पहुंचना उनके लिए किसी सुखद तोहफे से कम नहीं है। आसपास के गांवों और बस्तियों के लोग सुबह-सुबह बैराज के किनारे इकट्ठा होकर इन मेहमान पंछियों को निहारते दिखाई देते हैं। पर्यटकों के लिए भी यह स्थान इन दिनों आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। सप्ताहांत में बैराज के आसपास भीड़ बढ़ जाती है, क्योंकि लोग इस प्राकृतिक दृश्य को कैमरे में कैद करने का मौका नहीं छोड़ना चाहते।

हर साल बनती है सर्दियों की खास पहचान

फूलबाड़ी की सर्दियां प्रवासी पक्षियों की वजह से हमेशा खास मानी जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पंछियों की मौजूदगी न केवल इलाके की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि पर्यटक गतिविधियों को भी बढ़ावा देती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होता है। कई छोटे दुकानदारों और चाय-नाश्ते के स्टॉल मालिकों का कहना है कि परिंदों के आगमन से उनके व्यवसाय में रौनक लौट आती है।

दूर-दराज देशों से आने वाले मेहमान

महानंदा बैराज में हर साल रूडी शेलडाक, रिवर लैपविंग सहित कई दुर्लभ और खूबसूरत प्रजातियों के पक्षी शरण लेने आते हैं। ये पक्षी मुख्य रूप से मंगोलिया, तिब्बत, साइबेरिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके यहां पहुंचते हैं। ठंड के मौसम में यह इलाका इनके लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। सर्दी समाप्त होते ही ये परिंदे फिर अपने मूल निवास स्थानों की ओर लौट जाते हैं।

स्थानीयों में उत्सुकता-क्या इस बार संख्या और बढ़ेगी?

कई बुजुर्ग निवासियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से बैराज में पक्षियों के मौसम का उतार-चढ़ाव देखा है। उनका मानना है कि अगर आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट तेज हुई, तो प्रवासी पक्षियों की संख्या भी और बढ़ सकती है। कुछ पक्षी प्रेमी तो पक्षियों की पहचान और व्यवहार पर खुद छोटे-छोटे नोट्स बनाते दिखाई देते हैं।

फिलहाल, महानंदा बैराज की प्राकृतिक सुंदरता और इन पंख वाले मेहमानों की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को खुशनुमा बना दिया है। चाहे स्थानीय लोग हों या बाहर से आने वाले पर्यटक,सभी इस मनमोहक दृश्य का आनंद उठा रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह रंगीन नज़ारा और भी भव्य होगा।

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