दागापुर श्रमिक भवन में अधिकारी से बातचीत करते हुए  
सिलीगुड़ी

26 महीने बाद भी पुरानी दर पर वेतन, नई वेतन संधि की मांग को लेकर प्रदर्शन

 नागराकाटा: चाय बागानों के स्टाफ और सब-स्टाफ कर्मचारियों की अंतिम संशोधित वेतन संधि की अवधि समाप्त हुए 26 महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें अब भी पुरानी दर से वेतन दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर न तो बागान मालिक पक्ष और न ही श्रम विभाग की ओर से कोई ठोस पहल की गई है—ऐसा आरोप कर्मचारियों ने लगाया है। नई वेतन संधि को शीघ्र लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को स्टाफ-सब स्टाफ ज्वाइंट कमिटी के प्रतिनिधि उत्तर बंगाल के अतिरिक्त श्रम आयुक्त के कार्यालय पहुंचे और संबंधित अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। संगठन के संयोजक आशिष बसु ने कहा, “हम आंदोलन नहीं करना चाहते। लेकिन यदि इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।ज्वाइंट कमिटी ने बताया कि 31 दिसंबर 2023 को उनकी दो वर्ष की वेतन संधि की अवधि समाप्त हो गई थी। 1 जनवरी 2024 से तीन वर्षों के लिए नई वेतन संरचना लागू होने की बात थी। प्रचलित नियम के अनुसार यह प्रक्रिया त्रिपक्षीय बैठक के माध्यम से पूरी की जाती है। गत वर्ष 5 अगस्त को एक बैठक हुई थी, लेकिन उसमें कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद दुर्गापूजा के बाद पुनः बैठक बुलाने की बात कही गई थी, परंतु आज तक दूसरी बैठक नहीं हो सकी। आशिष बसु ने कहा, “5 अगस्त की बैठक में कहा गया था कि दुर्गापूजा के बाद फिर बैठक होगी। लेकिन केवल दुर्गापूजा ही नहीं, सभी त्योहार बीत गए, फिर भी बैठक नहीं हुई। यह बेहद निराशाजनक है।” उन्होंने कहा कि बागान कर्मचारियों में रोष लगातार बढ़ रहा है और उम्मीद है कि श्रम विभाग तथा मालिक पक्ष स्थिति की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र पहल करेंगे।

संगठन का कहना है कि नई वेतन दर पर निर्णय न होने से स्टाफ और सब-स्टाफ कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, बागानों में नई नियुक्तियां लगभग बंद होने के कारण प्रत्येक कर्मचारी को कई गुना अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं।

बुधवार को सिलीगुड़ी के दागापुर स्थित श्रमिक भवन में स्टाफ और सब-स्टाफ कर्मचारी एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। इस दौरान संगठन के नेताओं में साधन दासगुप्ता, अंजन समाद्दार, अमर बराकई, उदयन चक्रवर्ती और देवाशीष शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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