सिलीगुड़ी

कंचनजंघा एक्सप्रेस को पुराने रूट पर लौटाने की मांग

राबिया शेख, सिलीगुड़ी : कांचनजंघा एक्सप्रेस को फिर से उत्तर बंगाल के पुराने रेल मार्ग से जोड़ने की मांग उठ रही है। सुझाव है कि पूर्वोत्तर के सिलचर और त्रिपुरा के सबरूम तक चल रही मौजूदा सेवाओं को जारी रखते हुए सियालदह से न्यू जलपाईगुड़ी (एनजेपी) या सिलीगुड़ी के लिए अलग सेवा शुरू की जाए। इससे पूर्वोत्तर का रेल संपर्क भी बना रहेगा और उत्तर बंगाल को दक्षिण बंगाल से जोड़ने वाली पुरानी कड़ी भी मजबूत होगी।

नाम में पहाड़, जुड़ाव भी रहे

कांचनजंघा सिर्फ एक ट्रेन का नाम नहीं, बल्कि उत्तर बंगाल की पहचान से जुड़ा नाम है। साफ मौसम में सिलीगुड़ी से कांचनजंघा की बर्फीली चोटियां दिखाई देती हैं। खासकर बरसात के बाद और नवंबर-दिसंबर में ‘स्लीपिंग बुद्ध’ का दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में इस नाम वाली ट्रेन का उत्तर बंगाल से सीधा जुड़ाव फिर कायम करने की मांग को क्षेत्रीय भावना से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

शुरुआत ही एनजेपी से हुई थी

कांचनजंघा एक्सप्रेस ने 1 अप्रैल 1983 को हावड़ा और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच अपनी पहली यात्रा शुरू की थी। शुरुआत में यह सप्ताह में दो दिन चलती थी। यात्रियों की बढ़ती जरूरत के साथ सेवा बढ़ती गई और 1984 के अंत तक ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलने लगी। यानी इसके सफर की शुरुआती पहचान ही एनजेपी से जुड़ी थी।

गुवाहाटी से लेकर त्रिपुरा तक पहुंचा सफर

1989 के आसपास हावड़ा-न्यू बोंगाईगांव जनता एक्सप्रेस और एनजेपी-न्यू बोंगाईगांव तीस्ता-ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस को कांचनजंघा एक्सप्रेस से जोड़े जाने के बाद इसका विस्तार गुवाहाटी तक हुआ। 1991 में इसका प्रारंभिक स्टेशन हावड़ा से बदलकर सियालदह कर दिया गया।

समय के साथ पूर्वोत्तर तक पहुंच बढ़ाने के लिए ट्रेन का विस्तार होता गया। 8 अक्टूबर 2016 को इसे अगरतला तक बढ़ाया गया और बाद में सबरूम तक सेवा पहुंची। वर्तमान में सियालदह-सबरूम और सियालदह-सिलचर के बीच इसकी सेवाएं संचालित होती हैं।

पर्यटन के लिए भी अहम

एनजेपी और सिलीगुड़ी दार्जिलिंग, सिक्किम और डुआर्स जाने वाले यात्रियों के प्रमुख पड़ाव हैं। सियालदह से एनजेपी तक कांचनजंघा एक्सप्रेस की सीधी सेवा मिलने पर दक्षिण बंगाल से आने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिल सकती है। इससे पर्यटन सीजन में उत्तर बंगाल की कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

रेलवे के फैसले पर नजर

मांग का मूल उद्देश्य पूर्वोत्तर की मौजूदा रेल सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि कांचनजंघा एक्सप्रेस को उसके पुराने उत्तर बंगाल कनेक्शन से दोबारा जोड़ना है। अब नजर रेलवे पर है कि क्या इस ट्रेन को एनजेपी या सिलीगुड़ी तक फिर चलाने की दिशा में कोई पहल होती है।

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