प्रधान नगर मोक्ष फाऊंडेशन  
सिलीगुड़ी

नशेड़ियों को सही राह दिखाता नशा मुक्ति केंद्र

सिलीगुड़ी: नशा उम्र नहीं देखता यह किसी को भी अपने गिरफ्त में ले लेता है और नशे की लत लगने के बाद शुरू होता है तांडव, घर में झगड़ा, परिवार के सदस्यों के साथ वाद विवाद, मारपीट, अक्सर नशे की हालत में ही व्यक्ति आपराधिक घटनाओं को भी अंजाम देता है | आखिर इन नशेड़ियों को कैसे सुधारा जाए इसके लिए परिवार वाले चिंतित रहते हैं | लोगों में बढ़ती नशे की लत एक गंभीर चुनौती बन गई है प्रशासन की ओर से भी कई प्रकार के जागरूकता अभियान शिविर लगाए जाते हैं लेकिन इसका अभी तक सफल परिणाम नहीं निकला है | ऐसे में बहुत से नशा मुक्ति केंद्र है जो हर उम्र के नशेड़ी जो शराब,गांजा, ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले को नशे की लत से बाहर निकाल कर उन्हें सही रास्ता दिखा रहे हैं | सिलीगुड़ी के ऐसे चर्चित नशा मुक्ति केंद्र जो कई वर्षों से शहर वासियों को सेवा दे रहे हैं |

सिलीगुड़ी में लगभग 18 साल से सेवा देने वाले मोक्ष फाऊंडेशन के विक्रम गंजू फाउंडर सेक्रेटरी ने बताया कि युवाओं को सही रास्ता दिखाया जाता है और यहां कम खर्चे में ही सारी व्यवस्था की जाती है | सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के साथ मिलकर 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के दिन जागरूक रैली का भी आयोजन किया जाता है | यहां पर हर कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और स्वच्छता का विशेष ध्यान दिया जाता है | समय पर व्यायाम , नाश्ता, खाना, दिया जाता है साथ ही काउंसलिंग कर उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया जाता है | इन 18 सालों में लगभग 4,500 हजार लोग ठीक होकर जा चुके हैं और ऐसे बहुत से लोग हैं जो खुद ठीक होने के अब मोक्ष फाऊंडेशन के साथ दूसरों को भी नशे की लत से दूर रखने की इस मुहीम से जुड़ चुके हैं | लेकिन एक मलाल है, कई बार सरकारी मदद मिले इसकी कोशिश की गई लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी, सारे दस्तावेज होने के बावजूद अब तक सरकार की ओर से उन्हें मदद नहीं मिली है |

आशा फाउंडेशन सिलीगुड़ी में लगभग 7 सालों से अपनी सेवा दे रहा है | इसके लगभग 24 से 25 केंद्र हैं जो भारत के अलावा विदेशों में भी खुले है | आशा फाउंडेशन का मकसद आर्थिक स्थिति से पिछड़े लोगों की मदद कर उनके जीवन को बेहतर बनाना है | फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि ऐसे सैकड़ो युवा है जो यहां से स्वस्थ होकर जाने के बाद अपने जिंदगी को दोबारा शुरू कर चुके हैं और बहुत से लोग तो सुधारने के बाद भी यहीं पर रह गए हैं और फाउंडेशन के साथ ही कार्य कर रहे हैं | उन्होंने जानकारी दी, यहां पर विशेष कर शिष्टाचार के गुण सिखाए जाते हैं | सुबह 6:00 बजे से सभी अपने-अपने कामों में लग जाते हैं | पहले कसरत फिर चाय नाश्ता, काउंसलिंग उसके बाद छोटे-छोटे कामों को देकर उन्हें व्यस्त रखने का प्रयास किया जाता है | उनमें मानसिक सुधार लाने के लिए धार्मिक पुस्तकों की मदद ली जाती है, अभी तक तो बहुत से ऐसे युवक हैं जो यहां से ठीक होकर अपनी नई जिंदगी शुरू कर चुके हैं और यहां पर सारी सुविधा निःशुल्क दिए जाते है |

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