नागराकाटा: दिन का तापमान बढ़ते ही जलढाका नदी में खतरनाक तरीके से स्नान करने की घटनाएं फिर शुरू हो गई हैं। 17 नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलढाका पुल के पास स्थित परित्यक्त पुल के पिलर से कूदकर लोग नदी में स्नान कर रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा उत्साह छोटे बच्चों और किशोरों में देखा जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जलढाका नदी हमेशा से ही खतरनाक और तेज धारा वाली रही है। यहां कब और कहां हादसा हो जाए, इसका पहले से अनुमान लगाना मुश्किल है। ब्लॉक प्राकृतिक आपदा प्रबंधन अधिकारी रणित विश्वास ने बताया कि इस तरह के खतरनाक स्नान पर प्रशासन की नजर है। उन्होंने कहा कि इस नदी में उतरकर स्नान करना पहले से ही प्रतिबंधित है और इस संबंध में पुलिस की ओर से चेतावनी नोटिस भी लगाया गया है। पुराने आंकड़े बताते हैं कि जलढाका नदी में डूबकर कई लोगों की मौत हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर 14 अप्रैल 2024 को तेज धारा वाली इस नदी में स्नान करते समय बिन्नागुड़ी के सरुगांव इलाके के एक युवक की मौत हो गई थी।
उसी वर्ष 15 अगस्त को जलढाका में बह जाने के बाद बानरहाट के एक व्यवसायी का शव रामशाई इलाके से बरामद हुआ था। इसके बाद 28 अगस्त को नागराकाटा के पानी टंकी इलाके के एक युवक की भी इसी नदी में बहकर मौत हो गई थी। इससे पहले 9 जुलाई 2023 को भी इसी क्षेत्र के एक स्कूल छात्र की डूबने से मृत्यु हो चुकी है।केवल जलढाका ही नहीं, बल्कि नागराकाटा के आसपास बहने वाली गाठिया और डायना नदियों में भी डूबने की घटनाएं सामने आई हैं। जैसे 29 मई 2022 को गाठिया नदी में बह जाने से एक चाय बागान प्रबंधक की पत्नी और बेटी की मौत हो गई थी। वहीं पिछले वर्ष 12 जून को डायना नदी में एक ही दिन दो युवकों की डूबने से मौत हो गई थी।