अलीपुरदुआर: उत्तर बंगाल के पर्यटन जगत के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। ममता बनर्जी ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में माध्यम से ऐतिहासिक होलोंग वन बंगले के पुनर्निर्माण की आधारशिला रखी। इस घोषणा के साथ ही अलीपुरदुआर सहित पूरे उत्तर बंगाल के पर्यटन क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान को उत्तर बंगाल के पर्यटन का मुख्य आकर्षण माना जाता है। इसी उद्यान के होलोंग क्षेत्र में स्थित वन बंगला दशकों तक पर्यटकों का मुख्य आकर्षण रहा। स्वतंत्रता के बाद 1950 के दशक में निर्मित यह बंगला घने जंगलों के बीच प्रकृति के सान्निध्य का अद्भुत अनुभव प्रदान करता था। यहां कई गणमान्य व्यक्तियों ने प्रवास किया और वन्यजीवन के बीच शांत वातावरण का आनंद लिया। वर्ष 2024 में एक भीषण अग्निकांड में यह ऐतिहासिक वन बंगला पूरी तरह नष्ट हो गया था। इस घटना के बाद मादारीहाट और आसपास के पर्यटन क्षेत्र में निराशा की लहर दौड़ गई। हालांकि पर्यटक जलदापाड़ा आते रहे, लेकिन होलोंग वन बंगले के दर्शन और वहां ठहरने के अनुभव से वे वंचित रहे। लोगों के मन में लगातार यह सवाल उठता रहा कि आखिर कब यह ऐतिहासिक धरोहर फिर से खड़ी होगी। जलदापाड़ा के डीएफओ प्रवीण कासवान ने भी इस पुनर्निर्माण की खबर साझा करते हुए खुशी व्यक्त की। जिला प्रशासन के अनुसार लगभग 3 करोड़ 62 लाख रुपये की लागत से इस वन बंगले का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
अलीपुरदुआर की जिलाधिकारी आर. बिमला ने बताया कि नए निर्माण में पुराने स्वरूप और पारंपरिक वास्तुकला को बरकरार रखा जाएगा, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान अक्षुण्ण रहे। हर वर्ष लगभग 1 लाख 10 हजार पर्यटक जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान की सैर के लिए आते हैं। ऐसे में होलोंग वन बंगले का पुनर्निर्माण न केवल पर्यटन को नई गति देगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा। सरकार का उद्देश्य आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए इस परियोजना को पूरा करना है। पुनर्निर्माण के बाद होलोंग वन बंगला एक बार फिर प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। यह पहल उत्तर बंगाल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।