बामनडांगा चाय बागान  
सिलीगुड़ी

चार महीनें बाद मंगलवार से खुलेगा बामनडांगा चाय बागान

नागराकाटा: पिछले 5 अक्टूबर की विनाशकारी बाढ़ के बाद से बंद पड़ा बामनडांगा चाय बागान मंगलवार से पुनः सामान्य रूप से चालू हो रहा है। बाढ़ के बाद से यह दूरस्थ बागान अनौपचारिक रूप से बंद था, हालांकि न तो कार्य विराम और न ही लॉकआउट का कोई आधिकारिक नोटिस लगाया गया था। बामनडांगा चाय बागान के मालिक पक्ष ने कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है। मजदूरों के बकाया वेतन में से एक पखवाड़े का भुगतान रविवार को कर दिया गया है। बागान के परिचालक ऋत्विक भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें श्रमिकों के सहयोग की अपेक्षा है।हालांकि आमबाड़ी, चामुर्ची, रेड बैंक और सुरेंद्रनगर जैसे अन्य बंद चाय बागानों में दोबारा सायरन कब बजेगा, यह अब भी अनिश्चित है। नए चाय मौसम की शुरुआत में डुआर्स के “दो पत्ते और एक कली” की धरती पर खुशी और निराशा—दोनों का माहौल है।

5 अक्टूबर को जलढाका और गाठिया नदियों के उफान के संयुक्त प्रकोप से बामनडांगा और टंडू डिवीजन को भारी नुकसान हुआ था। बामनडांगा के मॉडल विलेज से बहकर 11 लोगों की मौत हो गई थी। पुल, कलवर्ट, घर और सड़कें जलप्रवाह में क्षतिग्रस्त हो गई थीं। स्थिति का जायजा लेने स्वयं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंची थीं। बाद में पुल, कलवर्ट और सड़कें ठीक कर दी गईं।

चार महीने तक बागान बंद रहने से 1100 श्रमिक परिवारों की आजीविका पर गहरा संकट आ गया। कई परिवारों के सदस्य रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों में चले गए। बागान खुलने के निर्णय का सभी ने स्वागत किया है। बामनडांगा की समस्याएं हालांकि बाढ़ से पहले ही शुरू हो चुकी थीं। शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले में कथित मिडलमैन के रूप में पूर्व मालिक की गिरफ्तारी हुई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी बागान में जांच की और संपत्ति को अटैच कर दिया गया। इससे वर्तमान मालिक पक्ष को संचालन में कठिनाई हुई। ऋत्विक भट्टाचार्य ने बताया कि उन्होंने अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष अटैचमेंट के खिलाफ आवेदन किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ से भारी नुकसान के बावजूद अब तक सरकारी स्तर पर बागान को कोई सहायता नहीं मिली है। तृणमूल चाय बागान श्रमिक यूनियन के केंद्रीय कमेटी के सह-उपाध्यक्ष संजय कुजूर ने बताया कि मंगलवार को गेट मीटिंग कर बागान खुलने की जानकारी श्रमिकों को दी जाएगी। बाढ़ के बाद श्रमिकों को श्रम विभाग की सरकारी मासिक वित्तीय सहायता योजना ‘फौलाई’ के तहत शामिल किया गया है और जल्द ही 3–4 महीनों की सहायता राशि मिल जाएगी। भाजपा समर्थित भारतीय टी वर्कर्स यूनियन के बामनडांगा नेता लक्ष्मण कावर ने कहा कि किससे बातचीत कर और किन शर्तों पर बागान खोला जा रहा है, इसकी जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि सब कुछ सुचारु रूप से चले, यही उनकी मांग है क्योंकि श्रमिक गंभीर कठिनाइयों में हैं। पूरे शीतकाल में बागान बंद रहने के कारण चाय पौधों की देखभाल नहीं हो सकी। अब काम शुरू होने पर सबसे पहले झाड़ियों की सफाई और पौधों की कटाई-छंटाई करनी होगी। कई सेक्शन में झाड़ियां फैल गई हैं और चाय के पौधे भी बड़े हो गए हैं।

इधर बानरहाट के चामुर्ची चाय बागान में पिछले पांच महीनों से ताला लटका है। श्रमिकों का आरोप है कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद मालिक पक्ष से कोई जवाब नहीं मिल रहा। अब बागान को किसी नए मालिक को सौंपने की मांग जोर पकड़ रही है। तृणमूल चाय बागान श्रमिक यूनियन के केंद्रीय कमेटी के एक अन्य सह-उपाध्यक्ष और बानरहाट के नेता तबारक अली ने बताया कि चामुर्ची में 21 श्रमिक दिन-रात बागान की संपत्ति की निगरानी कर रहे हैं। मालिक पक्ष से इन श्रमिकों को वेतन देने को कहा गया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। यहां तक कि श्रम विभाग की बात भी नहीं मानी जा रही है। ऐसी स्थिति में यदि बागान बंद रहता है तो राज्य सरकार द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रिया के तहत इसे नए मालिक को सौंपने की दिशा में श्रमिक जल्द ही उत्तर बंगाल के अतिरिक्त श्रम आयुक्त को हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपेंगे। आमबाड़ी, रेड बैंक और सुरेंद्रनगर के श्रमिकों की स्थिति भी लगभग तीन महीनों से ऐसी ही बनी हुई है। इन बागानों में संकट के बादल कब छंटेंगे, यह फिलहाल किसी को नहीं पता।

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