कालियागंज: कालियागंज नगरपालिका के 13 नंबर वार्ड स्थित महेंद्रगंज बाजार में सरकारी शौचालय की जमीन पर कथित रूप से बहुमंजिला मार्केट कॉम्प्लेक्स निर्माण किए जाने के आरोप को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशासनिक जांच में कई अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत निर्मित एक सार्वजनिक शौचालय के एक हिस्से को तोड़कर वहां मार्केट कॉम्प्लेक्स निर्माण कार्य शुरू किए जाने की शिकायत एक जागरूक नागरिक ने प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर जांच के आदेश दिए गए।
जांच रिपोर्ट में बिना अनुमति ढांचे के आंशिक ध्वस्तीकरण का उल्लेख
जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि शौचालय के एक हिस्से को आंशिक रूप से तोड़ा गया था और उसी स्थान पर बाजार कॉम्प्लेक्स निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शौचालय को तोड़ने से पहले संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
जांच के दौरान सरकारी भूमि अथवा सार्वजनिक ढांचे के उपयोग में परिवर्तन संबंधी कोई वैध दस्तावेज या स्वीकृति पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया, तकनीकी मूल्यांकन और आवश्यक अनुमोदन का पालन नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शौचालय का क्षेत्रफल कम होने से बाजार आने वाले आम लोगों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और दूर-दराज से आने वाले खरीदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्मित सरकारी ढांचे को व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करना जनहित के खिलाफ है। महेंद्रगंज बाजार जिले के सबसे व्यस्त बाजारों में से एक माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं। ऐसे में शौचालय सुविधाओं में कमी से स्वच्छता और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
निर्माण कार्य पर रोक और दोषियों पर कार्रवाई हो की मांग
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि यदि अनियमितताएं साबित होती हैं तो निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल जांच रिपोर्ट संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर कितना सख्त रुख अपनाता है।