सिलीगुड़ी

नमो सेवा - अज्ञात कहानी' प्रकल्प रद्द करने की मांग

Irfan E Azam

सिलीगुड़ी : ऑल बंगाल टीचर्स एसोसिएशन (एबीटीए) ने विद्यालयों पर थोपे गए 'नमो सेवा - अज्ञात कहानी' नाट्य प्रकल्प का तीव्र विरोध करते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। एबीटीए की दार्जिलिंग जिला कमेटी के सचिव विद्युत राजगुरु ने कहा कि, पश्चिम बंगाल के सभी शिक्षण संस्थानों में इस समय उच्च माध्यमिक के प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाएं चल रही हैं। कुछ ही दिनों में दुर्गा पूजा अवकाश भी शुरू होगा। उसके बाद विभिन्न कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं भी निकट हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रत्येक कक्षा में नियमित पठन-पाठन अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद राज्य का शिक्षा विभाग आए दिन विद्यालयों पर एक के बाद एक नए ‘प्रकल्प’ थोप रहा है। इसका नवीनतम उदाहरण 'नमो सेवा - अज्ञात कहानी' नामक एक नाट्य-पांडुलिपि है, जिसे विद्यार्थियों से मंचन कराने के लिए शिक्षण संस्थानों को दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि, एबीटीए ने इस पांडुलिपि की समीक्षा के बाद इसे चिंतनीय पाया है। पहला, साहित्यिक दृष्टि से यह रचना अत्यंत कमजोर है। भाषा प्रभावहीन है, संवादों में नाटकीयता का अभाव है और चरित्र-निर्माण में भी कोई गहराई दिखाई नहीं देती। बंगाल की समृद्ध एवं गौरवशाली नाट्य परंपरा की तुलना में इस स्तर की रचना को विद्यालयों में मंचित कराना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, दूसरा, यह केवल कमजोर साहित्यिक रचना का मामला नहीं है। नाटक का मूल विषय वर्तमान समय के एक अत्यंत विवादास्पद राजनीतिक व्यक्तित्व का एकतरफा महिमामंडन है। किसी राजनीतिक व्यक्ति के विवादास्पद सार्वजनिक जीवन को राष्ट्रीय प्रचार तंत्र के माध्यम से विद्यालयों में विद्यार्थियों के सामने ‘वीरगाथा’ के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि, भारत एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और बहुलतावादी देश है। इतिहास और समकालीन राजनीति के जटिल तथा विवादित पहलुओं को छिपाकर किसी एक राजनीतिक व्यक्तित्व की एकतरफा छवि का निर्माण करना विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, तर्कशीलता और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण के विकास के विरुद्ध है। तीसरा, जब शिक्षक और विद्यार्थी परीक्षा एवं पाठ्यक्रम पूरा करने में व्यस्त हैं, उस समय कक्षा-शिक्षण के बहुमूल्य समय में से इस प्रकार के राजनीतिक प्रचारात्मक कार्यक्रमों को थोपना विद्यार्थियों के शिक्षा के अधिकार के साथ अन्याय है। विद्यालय किसी भी राजनीतिक दल का प्रचार मंच नहीं हो सकता और विद्यार्थियों को राजनीतिक प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

एबीटीए की ओर से यह भी कहा गया है कि, पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था में अनावश्यक रूप से कभी छुट्टियों की घोषणा तो कभी विभिन्न दिवसों एवं कार्यक्रमों के आयोजन संबंधी निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। ऐसे अनेक प्रकल्प भी सामने आए हैं जिनका राज्य की स्थानीय शैक्षिक आवश्यकताओं से कोई सीधा संबंध नहीं है। शिक्षा विभाग को इस प्रवृत्ति पर रोक लगानी चाहिए।एबीटीए ने मांग की है कि, 'नमो सेवा - अज्ञात कहानी' नाट्य-पांडुलिपि को तत्काल एवं बिना शर्त वापस लिया जाए। विद्यालयों में राजनीतिक प्रचारात्मक एवं गैर-शैक्षणिक प्रकल्पों को रोककर नियमित कक्षा-शिक्षण और पाठ्यक्रम पूरा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। विद्यार्थियों के लिए तैयार किए जाने वाले सभी पाठ्य एवं सांस्कृतिक सामग्रियों में ऐतिहासिक तथ्यपरकता, धर्मनिरपेक्षता और राजनीतिक निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। शिक्षा क्षेत्र में तर्कसंगत, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और बहुलतावादी दृष्टिकोण की रक्षा के लिए एबीटीए लगातार संघर्ष करता रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक आंदोलन का आह्वान किया जाएगा।

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