सिलीगुड़ी : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य शिक्षा विभाग ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया है। शुक्रवार को जारी निर्देशिका के बाद वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हजारों शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। लंबे समय से नौकरी कर रहे इन शिक्षकों को अब दोबारा पढ़ाई कर टीईटी परीक्षा देनी होगी। परीक्षा में सफल नहीं होने पर नौकरी पर संकट मंडरा सकता है। राज्य शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक चार चरणों में टीईटी प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा तय की है। निर्देश के मुताबिक टीईटी में सफल नहीं होने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल या उससे कम समय बाकी है, उन्हें इस नियम से बाहर रखा गया है। इस फैसले से खास तौर पर उन शिक्षकों की परेशानी बढ़ी है, जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है। कई शिक्षक शारीरिक अस्वस्थता के साथ-साथ स्कूल में पढ़ाने, प्रशासनिक कार्य और बीएलओ की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। ऐसे में नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच टीईटी की तैयारी करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
सिलीगुड़ी के मल्लागुड़ी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक सत्यजीत कुंडू भी इस फैसले से चिंतित हैं। 50 वर्ष से अधिक उम्र के सत्यजीत ने अब नौकरी और परिवार संभालने के साथ दोबारा पढ़ाई शुरू कर दी है। उनका कहना है कि कम उम्र में परीक्षा की तैयारी करना आसान था, क्योंकि उस समय जिम्मेदारियां कम थीं। अब परिवार और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच दोबारा परीक्षा की तैयारी करना काफी मुश्किल होगा। वहीं, नक्सलबाड़ी के केतुगाबुड़ हाईस्कूल के शिक्षक मिठुन राय करीब 17 वर्षों से सेवा में हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक परेशानी, परिवार, स्कूल में पढ़ाने और अन्य जिम्मेदारियों के बीच परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए बेहद कठिन है। जानकारी के मुताबिक, देशभर में करीब 20 लाख ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें 2010 से पहले नियुक्त किया गया था। पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या करीब 90 हजार, जबकि सिलीगुड़ी शिक्षा जिले में 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की संख्या 3 हजार से अधिक बताई जा रही है।
शिक्षक संगठनों ने लंबे समय से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर अचानक टीईटी की शर्त लागू किए जाने पर चिंता जताई है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सिलीगुड़ी संगठनात्मक जिला अध्यक्ष अभिजीत मुखोपाध्याय ने कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए बाध्य है। कई शिक्षक संगठनों ने मिलकर अदालत में रिव्यू पिटीशन भी दायर की थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। अब वर्षों से पढ़ा रहे इन शिक्षकों के सामने नौकरी बचाने के लिए दोबारा परीक्षा पास करने की चुनौती खड़ी हो गई है।