सिलीगुड़ी : जल जीवन मिशन एवं अन्य योजनाओं के कार्य मद के भारी बकाया के लंबे अर्से से भुगतान न होने के विरोध में राज्य भर की भांति बुधवार को यहां भी सिलीगुड़ी पीएचई कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया। एसोसिएशन सदस्य ठेकेदार बाबू पाड़ा में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग के सिलीगुड़ी क्षेत्रीय कार्यालय के सामने एकत्रित हुए। अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता के कार्यालय के सभी प्रवेश एवं निकास द्वार पर ताला जड़ कर प्रतीकात्मक रूप से बंद कर विरोध दर्ज कराया। वहां धरना प्रदर्शन किया। इस वजह से कार्यालय के कई अफसर घंटों बाहर ही सड़क पर अपनी गाड़ी में ही अटके रहे।
प्रदर्शनकारियों की ओर से सिलीगुड़ी पीएचई कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव अनूप बसु ने कहा कि, इस दिन पश्चिम बंगाल राज्य के सभी पीएचई कार्यालयों में इसी प्रकार का धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। राज्य भर में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का बकाया है। अकेले सिलीगुड़ी में क्षेत्र में पीएचई ठेकेदारों का यह लगभग 100 करोड़ रुपये है। अगस्त 2024 से जल जीवन मिशन के फंड प्रभावी रूप से बंद हैं। मगर, विभागीय अधिकारियों की कड़ी निगरानी में सभी कार्य नियमों के अनुसार पूर्ण किए गए। केंद्रीय एवं राज्य सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा कार्य स्थलों का निरीक्षण किया गया था और कार्यों पर संतोष भी व्यक्त किया गया था। इसके बावजूद ठेकेदारों को अब तक एक रुपया का भी भुगतान नहीं किया गया है। इसके चलते उत्पन्न आर्थिक एवं मानसिक दबाव के कारण कई ठेकेदार गंभीर संकट में हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि, अनेक ठेकेदारों ने समय पर कार्य पूर्ण करने हेतु भारी ऋण लिया था। मगर, समय पर भुगतान न होने के चलते उत्पन्न आर्थिक संकट के कारण अनेक ठेकेदार अपने बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आवश्यकताओं एवं सामाजिक दायित्वों को पूरा कर पाने में भी अब असमर्थ हो गए हैं। वहीं, उनके अधीनस्थ हजारों श्रमिक भी बेरोजगार होकर दैनिक आजीविका से वंचित हैं। सिलीगुड़ी पीएचई कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन की शासन-प्रशासन से मांग है कि वर्ष 2022 से अब तक के लंबित सभी बकाया का तत्काल बिना किसी शर्त के भुगतान किया जाए। इस मांग पर अविलंब अमल नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हम और भी तीव्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस अवसर पर, पीएचई विभाग के सिलीगुड़ी क्षेत्र के अधीक्षण अभियंता बिश्वजीत पान ने कहा कि, गत डेढ़ वर्ष से केंद्र सरकार का अंश जारी नहीं हुआ है, जिसके कारण भुगतान में देरी हो रही है। समस्या के समाधान का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।