राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने शुक्रवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर के विद्यार्थियों से तकनीकी प्रगति और वैज्ञानिक शोध पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने सटीकता, नवाचार और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान खोजने के महत्व पर जोर दिया। संस्थान के 17वें दीक्षांत समारोह में कुल 1,265 डिग्रियां प्रदान की गईं।
असवाल ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति अनुमानों या जल्दबाजी में प्रकाशित शोधपत्रों के आधार पर नहीं हो सकती। इसके लिए सटीक आंकड़ों, विश्वसनीय तरीकों और गहन शोध की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “वास्तविक वैज्ञानिक नेतृत्व ज्ञान को सामाजिक प्रभाव, सतत विकास और दुनिया की वास्तविक चुनौतियों के समाधान में बदलने में निहित है।” उन्होंने भारत को वैश्विक वैज्ञानिक उत्कृष्टता के शिखर तक पहुंचाने और भविष्य में नोबेल स्तर की खोजों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए विभिन्न विषयों के बीच समन्वित शोध, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और जिम्मेदार वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता बताई।
समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए एक निदेशक पदक, 35 स्वर्ण पदक, 12 रजत पदक और 14 कांस्य पदक भी प्रदान किए गए। संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान कैंपस प्लेसमेंट में 94.37 प्रतिशत का समग्र प्लेसमेंट दर्ज किया। विद्यार्थियों को औसतन 12 लाख रुपये सालाना का वेतन पैकेज मिला। इस वर्ष के प्लेसमेंट में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग के दोहरी डिग्री कार्यक्रम के छात्र आर्यन मित्तल को टेस्ला की ओर से मिला 3.40 करोड़ रुपये सालाना का पैकेज प्रमुख आकर्षण रहा।
राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों का उल्लेख करते हुए असवाल ने एनडीएमए के तहत प्रधानमंत्री के 10-सूत्रीय कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य संकट के समय लोगों की सहायता करना है। उन्होंने जोर दिया कि आपदा से पहले की योजना और तैयारी प्रभावी एवं समयबद्ध प्रतिक्रिया सुनिश्चित कर सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन के प्रयासों में बेहतर समन्वय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आपदा जोखिमों से निपटने और प्रभावी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों तथा प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाना चाहिए।
एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. एच. एल. सूर्यवंशी ने कहा कि संस्थान शोध और नवाचार के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच संस्थान को लगभग 10.56 करोड़ रुपये की लागत वाली 15 प्रायोजित शोध परियोजनाओं की मंजूरी मिली। इसके साथ ही, संस्थान में जारी प्रायोजित शोध परियोजनाओं की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान संस्थान ने शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी संगठनों और उद्योग जगत के भागीदारों के साथ आठ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए।
सूर्यवंशी ने बताया कि संस्थान अपने शैक्षणिक बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजना पर भी काम कर रहा है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, डेटा साइंस तथा रक्षा एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है।