प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : शहरों के सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या आज एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। देखा जा रहा है कि हर साल शहर के सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति दर 5 से 10% तक कम होती जा रही है। जहां कभी कक्षाएं छात्रों से भरी रहती थीं, वहीं अब कई स्कूलों में आधी से भी कम उपस्थिति दर्ज की जा रही है। विभिन्न स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि यह स्थिति कोरोना महामारी के बाद से चिंताजनक हो गई है।
कारण : आर्थिक कठिनाइयां और पढ़ाई में कमी
कई बच्चों के घर की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से वे कम उम्र में ही पैसे कमाने के लिए छोटे-मोटे कामों में लग गए हैं। इसका परिणाम यह है कि उनकी पढ़ाई कहीं पीछे छूट गई है। स्थिति ऐसी है कि उनके लिए पढ़ाई से ज्यादा महत्व अब पैसा कमाना हो गया है। स्कूल की ओर से कई सुविधाएं दी जाने के बावजूद छात्र स्कूल नहीं आते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि स्कूल में शिक्षक मौजूद हैं, मगर बच्चे ही नहीं है, जिससे क्लास खाली चली जाती है।
कोचिंग क्लास का बढ़ता ट्रेंड
देखा जा रहा है कि बच्चे स्कूल में नियमित कक्षाएं करने के बजाय निजी कोचिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कई मामलों में बच्चे घर चलाने के लिए दिन में काम करते हैं और शाम में कोचिंग करके पढ़ाई कंप्लीट करना बेहतर समझते हैं। वे बस नाम मात्र के लिए स्कूल में एनरोल कराते हैं, ताकि उन्हें सर्टिफिकेट मिल सके।
डिजिटल मनोरंजन ने बढ़ायी चिंता
सोशल मीडिया, मोबाइल और अन्य आधुनिक सुविधाओं ने भी बच्चों का ध्यान स्कूल से हटा दिया है। ऑनलाइन गेम्स, वीडियो और मनोरंजन एप्स में बच्चों का समय और ऊर्जा खर्च हो रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
क्या कहा स्कूल के हेडमास्टरों ने?
बैण्डेल महात्मा गांधी हिंदी विद्यालय के हेडमास्टर विजय कुमार प्रसाद ने बताया कि हर साल स्कूल में छात्रों की उपस्थिति दर 8 से 10% तक कम होती जा रही है। उदाहरण के तौर पर 2024 में कुल 1,350 छात्रों ने एडमिशन लिया था। वहींं 2025 में यह संख्या घटकर 1,250 और 2026 में 1,140 पर पहुंच गई है। कई बच्चे गरीबी के कारण स्कूल में एडमिशन नहीं लेते हैं, ऐसे बच्चों को एडमिशन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और उनसे एडमिशन के नाम पर कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता है। वहीं बांसबेड़िया गैंजेस हाई स्कूल के हेडमास्टर विशाल तिवारी ने बताया कि हर साल स्कूल में छात्रों की उपस्थिति दर 5 से 10% तक कम होती जा रही है।