शिक्षा

अब माइनर विषय में फेल होने पर भी नहीं रुकेगी पढ़ाई, कलकत्ता यूनिवर्सिटी ने बदले नियम

प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : अब अगर कोई स्टूडेंट माइनर सब्जेक्ट में फेल हो जाता है, तो भी वह आगे की पढ़ाई जारी रख सकता है। पहले ऐसा नियम नहीं था लेकिन कलकत्ता यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के कई दौर के गहन मंथन के बाद उसमें कई बदलाव किये हैं। बता दें कि पहले अगर कोई स्टूडेंट किसी माइनर सब्जेक्ट में फेल हो जाता था, तो वह अगले कोर्स में शामिल नहीं हो सकता, जिससे उसका एक एकेडमिक साल बर्बाद हो जाता था। चूंकि सप्लीमेंट्री परीक्षा सिस्टम बंद कर दिया गया है, इसलिए कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने इस मुश्किल का हल निकालने के लिए कई दौर की बैठकें कीं। हालांकि, यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने आखिरकार कुछ नियमों में बदलाव करके कुछ खास शर्तों के साथ बीच का रास्ता अपनाया है। इस बारे में कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर आशुतोष घोष ने बताया कि कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। उन्होंने समझाया, मुख्य चुनौती 7वें सेमेस्टर के स्टूडेंट्स से जुड़ी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि इस सेमेस्टर में स्टूडेंट्स के पास पुराने अंडरग्रेजुएट फॉर्मेट की जगह नए सिस्टम के तहत 'ऑनर्स विद रिसर्च' करने का विकल्प है। इसके लिए 7.5 CGPA बनाए रखना जरूरी है, जो किसी सब्जेक्ट में फेल होने पर हासिल नहीं किया जा सकता। नतीजतन, किसी सब्जेक्ट में फेल होने वाला स्टूडेंट 'ऑनर्स विद रिसर्च' प्रोग्राम में एडमिशन नहीं ले सकता। एडमिशन पाने के लिए उन्हें एक साल बाद सेमेस्टर परीक्षा दोबारा देनी होगी और जरूरी 7.5 CGPA हासिल करना होगा और फिर एनरॉल करना होगा, क्योंकि सप्लीमेंट्री परीक्षा सिस्टम अब लागू नहीं है।

इसका क्या मतलब है?

वाइस-चांसलर ने समझाया कि अगर कोई स्टूडेंट पहले और छठे सेमेस्टर के बीच किसी सब्जेक्ट में फेल हो जाता है, तो उसे सातवें सेमेस्टर में एनरॉल करने की इजाजत है। हालांकि, एक अहम शर्त यह है कि स्टूडेंट को उसी कॉलेज में एनरॉल करना होगा, जहां उसने पहले पढ़ाई की थी। वहीं नियम 7वें सेमेस्टर के लिए भी लागू रखा गया है। इसके अलावा, फेल होने की दर को कम करने के लिए सभी सेमेस्टर में समानता बनाए रखने के हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार करने का फैसला किया गया था।

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