प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : समग्र शिक्षा मिशन से फंड न मिलने के कारण, राज्य भर के स्कूल एक के बाद एक मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं। हेडमास्टरों की शिकायत है कि स्कूलों को चालू रखना एक चुनौती बन गई है। यह बात सामने आई है कि राज्य के ज़्यादातर स्कूलों में, 'कम्पोजिट फंड' के ज़रिए मिलने वाली रकम, असल ज़रूरत का सिर्फ़ एक-चौथाई ही है। नतीजतन, स्कूल प्रशासन को रोज़मर्रा के कामकाज चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि स्कूल, राज्य और केंद्र सरकारों के बीच चल रही खींचतान की लड़ाई में फंस गए हैं।
आरोप है कि केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा मिशन के तहत अलग-अलग ज़िलों में 'मॉडल स्कूल' बनाने के निर्देश दिए थे। हालांकि उन स्कूलों को 'PM स्कूल' (प्रधानमंत्री स्कूल) नाम का दर्जा देना था, मगर राज्य सरकार ने इस खास योजना में शामिल होने से मना कर दिया। राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट के नाम के आगे प्रधानमंत्री का नाम जोड़ने को लेनर आपत्ति जताई है। बंगीय शिक्षक व शिक्षा कर्मी समिति के महासचिव स्वपन मंडल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है। उनका तर्क है, कि राज्य सरकार उन दूसरी योजनाओं से फ़ंड लेने को तैयार है, जिनके नाम में प्रधानमंत्री का नाम जुड़ा है। तो फिर, 'PM School' पहल को स्वीकार करने में क्या दिक्कत है।