प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों के कार्यालयों में पहले ही 'फेशियल रिकग्निशन अटेंडेंस सिस्टम' लागू किया जा चुका है। ठीक उसी प्रकार अब जल्द ही स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) पर आधारित उपस्थिति का यह तरीका शुरू किया जा सकता है। जनकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसमें घोषणा की गई कि 15 जून से सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। यह नियम राज्य भर में सभी स्तरों के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर लागू होगा। अब विकास भवन ने भी इसी तरह का नोटिफिकेशन जारी किया है। शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच इस बारे में चर्चा शुरू हो गई है। अधिकांश शिक्षक स्कूलों में इस सिस्टम को लागू करने का समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि पहले कई शिक्षक, जिन्हें सत्ताधारी पार्टी का समर्थन प्राप्त था, समय पर क्लास में नहीं आते थे। बार-बार शिकायत के बावजूद उन्हें अनुशासित नहीं किया जा सका। ऐसे में अब बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करना फायदेमंद होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अनियमित उपस्थिति अब संभव नहीं होगी। जानकारी के मुताबिक अब तक, उपस्थिति रजिस्टर हेडमास्टर के कमरे में रखा जाता था, जहा हर कोई सुबह 11:30 बजे तक साइन करता था। खबरों के अनुसार, अब यह तरीका बदल सकता है। हालांकि, कुछ स्कूलों ने अपनी पहल पर पहले ही बायोमेट्रिक सिस्टम शुरू कर दिया था। उदाहरण के लिए, कोलकाता के जादवपुर विद्यापीठ में काफी समय से ऐसा सिस्टम लागू है।
क्या कहना है शिक्षक संगठन का?
बंगीया शिक्षक व शिक्षाकर्मी समिति के जनरल सेक्रेटरी स्वपन मंडल ने कहा, यह फ़ैसला हर नजरिए से सही है। एक टीचर का मुख्य काम पढ़ाना होता है। यह पहल उन लोगों के लिए बिल्कुल सही है, जो सत्ताधारी पार्टी की आड़ में अपनी ज़िम्मेदारियों से बचते आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, कई कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ में बायोमेट्रिक सिस्टम पहले से ही लागू हैं।