प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : जेयू की रिसर्च कमेटी अब बांग्ला विभाग में PhD एडमिशन से जुड़े आरोपों की जांच करेगी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि PhD एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कोई कमी नहीं है और जानकारी छिपाने के जो आरोप सामने आए हैं, वे बेबुनियाद हैं। जेयू के बांग्ला विभाग में PhD एडमिशन की प्रक्रिया हाल ही में शुरू हुई थी। तीन आवेदकों पर जानकारी छिपाने के आरोप लगाए गए थे। इनमें से एक व्यक्ति ने पहले 2018 में जेयू में ही किसी दूसरे विषय में PhD के लिए आवेदन किया था, उनका रजिस्ट्रेशन भी पूरा हो चुका था। हालांकि, उन्होंने अपना रिसर्च का काम पूरा नहीं किया।
एक अन्य उम्मीदवार ने हाल ही में एक केंद्रीय यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन वहां रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ायी। इसके बाद जेयू में एडमिशन पाने की चाह में उन्होंने वहां एक बार फिर आवेदन किया, जिसके बाद उनके नाम मेरिट लिस्ट में आ गए। इसके बाद, कई अन्य आवेदकों ने वाइस-चांसलर को एक लिखित शिकायत सौंपी, जिसमें PhD एडमिशन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
शिकायतकर्ताओं ने जानकारी छिपाने के आरोपित दोनों उम्मीदवारों के आवेदन रद्द करने की मांग की। इस बीच, यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने कहा कि हम इस समय इस मामले पर और कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हमारी पॉलिसी के मुताबिक, अब रिसर्च कमेटी इस मामले की समीक्षा करेगी और इस पर फैसला लेगी।