प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : स्कूल की लापरवाही की वजह से 50 कैंडिडेट इस बार माध्यमिक परीक्षा में नहीं बैठ पाए। इस वजह से उनका एक साल बर्बाद हो गया और चूंकि एडमिट कार्ड जारी हो चुका है, इसलिए उन्हें इस साल की परीक्षा में भी 'फेल' माना जाएगा। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एडमिट कार्ड बांटने का समय तो बढ़ा दिया, लेकिन राज्य के 45 स्कूल उन्हें लेने के लिए साॅल्टलेक ऑफिस नहीं गए। इनमें कोलकाता के दो स्कूल भी शामिल हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में तो हेडमास्टर या उनके प्रतिनिधि, स्कूल के सीनियर टीचर या एजुकेशन स्टाफ के बजाय, अपने भतीजे या बेटे को एडमिट कार्ड लेने भेजे थे।
क्या कहा बोर्ड प्रेसिडेंट ने?
बोर्ड प्रेसिडेंट रामानुज गंगोपाध्याय, इस मामले से बहुत नाराज हैं। उन्होंने कहा कि 'एग्जाम खत्म होते ही मैं स्कूलों के खिलाफ डिसिप्लिनरी एक्शन लूंगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं कभी न हों। बता दें कि बोर्ड ने परीक्षा से तीन दिन पहले एनरोलमेंट फॉर्म भरने के लिए 27-28 जनवरी को पोर्टल खोला था। इस दौरान 954 स्कूलों के 1,966 स्टूडेंट्स का एनरोलमेंट पूरा हुआ। इसके बाद 31 जनवरी को रात 8 बजे तक 86 स्कूलों ने 103 स्टूडेंट्स के एडमिट कार्ड नहीं लिए थे। फिर बोर्ड ने 1 फरवरी को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक फिर से एडमिट कार्ड बांटे, मगर तब भी 45 स्कूलों के 50 से ज़्यादा कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड नहीं लिए गए।