डाक सेवाएं 
शिक्षा

आज भी प्रासंगिक है इतिहास के आईने में डाक विभाग की सेवाएं !

9 अक्टूबर (विश्व डाक दिवस)

Om Prakash Mishra

समूचे विश्व में प्रतिवर्ष नौ अक्टूबर को 'विश्व डाक दिवस' का आयोजन किया जाता है। हमारे देश में इसी दिन से डाकविभाग लोगों में जागरुकता रोजमर्रा के जीवन में डाक की महत्ती भूमिका से अवगत कराने के उद्देश्य से तमाम जानकारियों संबंधी कार्यक्रम व गति विधियां जनता तक पहुंचाने का कार्य करता है। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अवसर पर सभी जिला मुख्यालयों के डाकघरों में विशेष आयोजन के माध्यम से डाकघर बचत बैंक में जमा पूंजी से आमजन व सीनियर सिटीजन को मिलने वाले लाभों से उन्हें जागरूक करना जैसे वृहद, कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। सेवा व डाक विभाग की नई पहल जो सीधे जन जीवन से जुड़ी हुई हैं के बारे में सीधे तौर पर 'जनता की बहुमूल्य राय भी ली, जाती है। जनता की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी योजनाओं से ग्रामीणों को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से प्रधानमंत्री जीवन ज्योति, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना तथा अटल पेंशन योजना के तहत उन्हें अवगत कराया जाता है l

भारतीय डाक प्रणाली बहुत प्राचीन है

भारतीय डाक विभाग के डाकघरों को चार श्रेणियों में विभक्त किया गया है जिसमें प्रधान डाकघर, उप-डाकघर, अतिरिक्त विभागीय उप-डाकघर के अलावा अतिरिक्त विभागीय शाखा डाकघर। ये डाकघर किसी भी क्षेत्र में निर्धारित जनसंख्या व दूरी के आधार पर जनता के लिए खोले जाते हैं। भारतीय डाक प्रणाली बहुत प्राचीन है जो कि पूरे विश्व में सबसे बड़ी है। भारत का डाक तार विभाग एक बहुत बड़ा संगठन है, जिसमें लाखों लोग कार्यरत हैं। भारत सन् 1876 से विश्व डाक संघ का सदस्य है। विश्व के लगभग सभी देशों देशों से हमारे संचार संबंध हैं। हमारे देश में व्यवस्थित् व नियमित डाकसेवा शुरू करने का श्रेय ईस्ट इंडिया कंपनी को जाता है जिसने सन् 1727 में सबसे पहले डाकघर की स्थापना की। सन् 1774 में महाजनी डाक व्यवस्था के जरिये ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ शुल्क लेकर निजी पत्रों को भेजने की व्यवस्था प्रारम्भ की गई। इसके साथ ही 1854 में डाकघरों के बाहर लाल रंग के लेटरबॉक्स लगाए गये। हमारा देश जब सन् 1947 में आजाद हुआ तब पूरे देश में 22 हजार 116 डाकघर थे। आज इनकी संख्या 1.55 लाख से भी ज्यादा है।

देश का सबसे ऊँचा डाकघर

देश का सबसे ऊँचा डाकघर सिक्किम में हैं जो 14567 फ़ीट की ऊंचाई पर हैं। श्रीनगर की डल झील में हाउस बोट पर तैरता हुआ भी एक डाकघर हैं। हमारे देश में 89% डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में है। भारत एशिया का पहला देश है जिसने सर्वप्रथम डाकटिकट जारी किया था। सन् 1940 में बंगाल में सर्वप्रथम डाकिये की नियुक्ति की गई थी। 1952 से पहले ताम्र डाक टिकटों का प्रचलन था जिनका शुल्क डाकघरों में जमा होता था। देश में सर्वप्रथम रजिस्ट्री पत्रों की शुरुआत मुंबई में हुई थी। पार्सल व पत्रों की बीमा प्रणाली 1874 में हुई व 1884 से यह नियम भी लागू किया गया जिसके तहत पोस्टमैन घर-घर जाकर मनीआर्डर वितरित करने लगे। तार से मनी- आर्डर भेजने की व्यवस्था 1884 में हुई थी 1885 में विदेशों में भी मनी आर्डर भेजा जाने लगा। ब्रिटिश पोस्टल आर्डर 1884 से बाद में शुरू हुआ बाद में 1935 से भारतीय पोस्टल आर्डर जारी किया गया।  सन् 1851 में प्रथम टेलीग्राम सेवा शुरू हुई थी तो 1883 में देश के सभी डाकघरों में यह सेवा जारी कर दी गई। हवाई डाक सेवा की शुरुआत 1911 में इलाहाबाद से नैनी तक की गई थी जबकि रेल डाकसेवा 1853 में प्रारम्भ हुई। 

भारत में प्रथम पोस्टकार्ड 1879 में

बना जिस पर महारानी विक्टोरिया का चित्र था। आजादी के बाद 6 जून 1949 को लिफाफा प्रचलन में आया जिस पर अशोक स्तम्भ अंकित था तो 7 दिसम्बर 1949 को पहला भारतीय पोस्टकार्ड जारी किया गया जिसकी कीमत 9 पैसे थी। 1934 में रसीदी डाक टिकट डाकघरों में बिक्री हेतु जारी किये गये। हवाई डाक टिकट 1929 में ही प्रचलन में थे। देश में पहला डाक टिकट 21नवम्बर 1947 में पोस्ट ऑफिस में जारी हुआ जिस पर राष्ट्रीय चिह्न व जयहिन्द लिखा हुआ था' नई दिल्ली में सर्वप्रथम डाक संग्रहालय 12 नवम्बर 1938 को खोला गया था। 

हमारा देश आजाद होने के बाद भारतीय डाक विभाग नेटवर्क में विश्व का सबसे बड़ा पोस्टल नेटवर्क बन चुका है। देश में पिनकोड नम्बर इसी के आधार पर डाक का वितरण किया जाता है। सूचना तकनीक के जरिये नये माध्यमों के द्वारा स्पीड पोस्ट' सेवा एक नई क्रांति का ही द्योतक है। डाक विभाग ने डाक, पार्सल तथा पत्रों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने में बड़ी कामयाबी हांसिल की है। आम जन को बैंक जैसी लाभप्रद सुविधाएं देने की दिशा में 1 सितम्बर 2018 से 'इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के रूप में सक्रिय किया गया है जिससे करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। आज भले ही मोबाइल व कम्प्यूटर क्रांति का जमाना है  लेकिन इतिहास के आइने में डाक विभाग की प्रासंगिकता का भविष्य आम जन मानस के लिए उज्ज्वल व आशा की किरण है। (युवराज) चेतन चौहान 

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