प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : चुनाव के कारण, कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में पहले सेमेस्टर की परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता चरम पर है। इसके बिल्कुल विपरीत, बर्दवान, कल्याणी और उत्तर बंगाल विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कॉलेजों में सेमेस्टर परीक्षाएं पहले ही संपन्न हो चुकी हैं। ऐसे में शिक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि एक ही राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं के इन अलग-अलग कार्यक्रमों का उच्च शिक्षा पर हानिकारक प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा चुनाव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात केंद्रीय बलों के कर्मियों को ठहराने के उद्देश्य से, कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कॉलेजों को पहले ही 'अधिगृहीत' कर लिया गया है या आने वाले दिनों में अधिगृहीत किए जाने की उम्मीद है। परिणामस्वरूप, कलकत्ता विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि 13 अप्रैल के बाद निर्धारित पहले सेमेस्टर की सभी परीक्षाएं अगली सूचना तक के लिए स्थगित की जा रही हैं। यह स्थिति एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा कर रही है। कहा जा रहा है कि चुनाव के समय के बारे में काफी पहले से जानकारी होती है, ऐसे में उचित व्यवस्थाएं क्यों नहीं की गई।
ऑल बंगाल प्रिंसिपल्स काउंसिल के अधिकारी का वक्तव्य
ऑल बंगाल प्रिंसिपल्स काउंसिल के महासचिव मानस कवि ने कहा, उच्च शिक्षा संसद को तुरंत दखल देकर एक ही राज्य में मौजूद इस असमानता को खत्म करना चाहिए। जहां अकादमिक सत्र, परीक्षाएं और नतीजों की घोषणा अलग-अलग समय पर होती है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पूरी प्रक्रिया हर जगह एक ही समय पर पूरी हो। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों का होता है।