प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : डांस, सिंगिंग या ड्राइंग सीखना एक समय में ‘एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज’ माना जाता था, मगर अब स्थिति बदल रही है। शिक्षा विभाग प्रयास कर रहा है कि कम उम्र से ही छात्रों में विभिन्न ‘को-करिकुलर’ गतिविधियों को शामिल किया जाए और स्कूल के वार्षिक परिणाम में भी उसे दर्शाया जाए। स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष से प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्तर के पाठ्यक्रम में म्यूजिक, डांस, ड्रामा, कविता पाठ तथा अलग-अलग प्रकार के कागज (ओरिगेमी) से विभिन्न आकृतियां बनाने का प्रशिक्षण शामिल किया जाएगा। इन को-करिकुलर गतिविधियों के अंक भी वार्षिक मूल्यांकन में जोड़े जाएंगे। हालांकि कई इंग्लिश मीडियम प्राइवेट स्कूलों में पहले से ही इन विषयों के लिए अलग-अलग कक्षाएं संचालित होती हैं।
हालांकि राज्य के स्कूलों में लंबे समय से ऐसी व्यवस्था नहीं थी। विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, “शिक्षकों को डी.एल.एड. या बी.एड. के दौरान इन विषयों की प्रारंभिक ट्रेनिंग दी जाती है। इसलिए वे छात्रों को इस विषय की ट्रेनिंग दे सकेंगे। इस बारे में कल्याणी पन्नालाल इंस्टीट्यूशन के हेड मास्टर रामेनचंद्र भवाल ने कहा कि यह एक अच्छा कदम है। इसके चलते छात्रों का समग्र विकास होगा और उनकी अनेक प्रतिभाएं भी सामने आएंगी।