प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कलकत्ता यूनिवर्सिटी (सीयू) अपने नियम बदल रही है, ताकि ज्यादा कॉलेज टीचर PhD कर सकें। पिछली सिंडिकेट मीटिंग में खुद वाइस चांसलर आशुतोष घोष ने इसका प्रस्ताव रखा था। सूत्रों के मुताबिक अगली सिंडिकेट मीटिंग में इस पर आखिरी फैसला लिया जाएगा। 2022 में UGC ने कॉलेज टीचरों की PhD को लेकर कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की थीं, लेकिन सीयू ने अब तक उन्हें लागू नहीं किया है। इस वजह से एक तरफ कॉलेज टीचरों में गुस्सा बढ़ रहा था, ऐसे में यूनिवर्सिटी उस मुश्किल से निकलने के लिए नियम बदल रही है। सीयू ने कॉलेज टीचरों को PhD करने की कंडीशनल इजाजत दे दी थी। पिछली सिंडिकेट मीटिंग (यूनिवर्सिटी में सबसे बड़ी पॉलिसी बनाने वाली बॉडी) में इस पर एक पॉजिटिव फैसला लिया गया था। 2022 के UGC रूल्स के मुताबिक PhD करने के लिए कॉलेज का परमानेंट टीचर होना जरूरी है। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पास PhD डिग्री होनी चाहिए और कम से कम 5 रिसर्च पेपर पीयर-रिव्यूड या UGC-लिस्टेड जर्नल्स में पब्लिश हुए होने चाहिए। असिस्टेंट प्रोफेसर के मामले में कम से कम 3 रिसर्च पेपर होने चाहिए। जिस कॉलेज से वे PhD करना चाहते हैं, उस कॉलेज के टीचर को कॉलेज में मास्टर कोर्स पढ़ाना होगा। कॉलेज में एक रिसर्च सेंटर होना चाहिए। अगर रिटायरमेंट में सिर्फ 2 साल बचे हैं, तो कोई भी टीचर नए PhD रिसर्चर का सुपरवाइजर नहीं बन सकता। हालांकि कॉलेज प्रिंसिपलों के संगठन के एक सदस्य का दावा है कि 'सिर्फ PG ही नहीं, हम चाहते हैं कि यह परमिशन उन सभी कॉलेजों को मिले जो अंडरग्रेजुएट कोर्स भी ऑफर करते हैं क्योंकि, अब नई एजुकेशन पॉलिसी में स्टूडेंट्स के लिए चौथे साल में रिसर्च करना जरूरी है।