आज की भाग दौड़ की जिन्दगी में आदमी इतना व्यस्त है कि उसे हंसने तक की फुर्सत नहीं है लेकिन न हंसना भी जिन्दगी में परेशानी का सबब बन सकता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कदम-कदम पर दुखों और मानसिक तनावों के मेले नजर आते है। ऐसे में इसकी महत्ता और उपादेयता और भी अधिक बढ़ जाती है। हास परिहास के बिना जीवन एकदम नीरस व उबाऊ हो जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हंसना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है और यह एक अच्छे टॉनिक का कार्य करता है। इससे जीवन में मधुरता का संचार ही नहीं होता अपितु कुछ देर के लिए व्यक्ति अपने सारे दुःखों को भूलकर आत्मसुख का अनुभव करता है। हंसने से शरीर का आंतरिक व्यायाम होता है जिससे शरीर तथा मस्तिष्क दोनों ही चुस्त रहते हैं।
खुलकर हंसने से व्यक्ति के रक्त संचार की गति बढ़ जाती है तथा पाचन तंत्रा अधिक कुशलता से कार्य करता है। हंसने से ऑक्सीजन का संचार अधिक मात्रा में होता है और दूषित वायु शरीर से बाहर निकल जाती है। हंसने से चेहरे व पेट के विविध हिस्सों की हल्की मालिश भी स्वतः हो जाती है। फलतः पाचन किया सामान्य बनी रहती है। संपूर्ण स्नायुतंत्रा से शिथिलता का लोप होकर एक नये उत्साह का संचार होता है।
हंसने से थकान, मानसिक तनाव और शारीरिक दर्द में भी कमी आती है। पसीना अपेक्षाकृत अधिक निकलता है जिससे शरीर की गंदगी आसानी से बाहर निकल जाती है। ठहाका मारकर हंसने से न केवल यकृत अपना कार्य सुचारू रूप से करने लगता है बल्कि शरीर के अन्य महत्त्वपूर्ण अंग जैसे फेफड़े, हृदय, पेट, वक्ष आदि भी सक्रिय होकर अपना काम ठीक ढंग से करने लगते हैं।
सही मायने में देखा जाए तो हंसने-हंसाने की प्रक्रिया मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाती है जिससे शरीर में रोगों से प्रतिरोध करने की क्षमता बढ़ती है। हास-परिहास के वातावरण में रहने से चिंताएं दूर होती है और भय खत्म होता है तथा क्रोध की भावना नष्ट होती है।
ऐसा देखा गया है कि हंसमुख व्यक्ति दीर्घायु होता है और गंभीर से गंभीर कार्यों का संपादन हंसते हुए कर देता है। भरपूर हंसी शरीर की आंतरिक जॉगिंग है। आजकल के तनावयुक्त जीवन में हंसना स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान है क्योंकि जिसे हंसी मिल जाए उसे सबसे बड़ी दौलत हासिल हो जाती है। हंसना एक अद्भुत कला है जो जीवन में मनुष्य के लिए सार्थक एवं उपयोगी है। जहां तक हो सके, स्वयं तो हंसें ही और दूसरों को हंसाने का भी हर संभव प्रयास करें।
हंसते समय इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि किसी की मजबूरी या लाचारी का कभी मजाक न बनने पाये। साथ ही साथ वक्त, उम्र, वातावरण, परिस्थिति, मनस्थिति आदि के तकाजे का भी अवश्य ध्यान रखें। अनिल कुमार(स्वास्थ्य दर्पण)