शरीर शुद्धि के लिए नेति क्रियाएं शरीर शुद्धि के लिए नेति क्रियाएं
संजीवनी

शरीर शुद्धि के लिए नेति क्रियाएं

योग

शरीर की आंतरिक शुद्धि करने के लिए योगियों ने अद्भुत क्रियाओं का आविष्कार किया है। इन क्रियाओं को षट्कर्म कहते है। षट्कर्म के अन्तर्गत नेति, धौति, नौलि, बस्ति, कपालभाति और त्राटक आते हैं।

नासिका प्रदेश की शुद्धीकरण की विधि नेति कहलाती है। इससे कान, नाक, आँख तथा गले की अनेक बीमारियाँ ठीक होती हैं। नेति तीन प्रकार की होती है घृत नेति या तेल नेति, रबर नेति या सूत्रा नेति, जल नेति तेल नेति या घृत नेति।

नाक में गाय का घी, बादाम, सरसों और षटबिन्दु तेल डालने को नेति कहते हैं। इससे कुपित कफ के कारण उत्पन्न जुकाम, सिरदर्द, स्मरण शक्ति, बालों का गिरना आदि रोग नष्ट हो जाता हैं। अलग-अलग तेल से अलग-अलग रोग ठीक होते हैं।

नकसीर (नाक से खून आना) के रोगियों के लिए चार तेल की नेति, स्मरण शक्ति बढ़ाने एवं अनिद्रा के रोगी के लिए षट्बिन्दु या बादाम तेल की नेति करना लाभदायक होता है।

करने की विधि:- पीठ के बल लेटकर गर्दन को तख्त या चारपाई की पाटी के नीचे की और लटकाकर नाक में घृत या तेल (दो, तीन बूँद) डालते हैं। इस प्रकार इस नेति की हमारे स्वभाव को उत्तम बनाये रखने में महत्ती भूमिका है।

रबर नेति : नासिका प्रदेश की शुद्धि रबर की नली के द्वारा की जाती है। यह विधि रबर नेति कहलाती है। इससे जीर्ण, जुकाम, दमा, साइनस, बहरापन, बाल सफेद होना, बाल झड़ना, खांसी, स्नोफीलिया, ब्रोंकाइटिस, माइग्रेन, अवसाद, उत्तेजना आदि रोग ठीक होते हैं।

करने की विधि:- रबड़ नली का पतला सिरा नासिका के दांये छिद्र में डालकर धीरे-धीरे आगे बढ़ाते हैं। तब यह सिरा गले तक पहुँच जाता है तो दायें हाथ की तर्जनी और मध्यमा अंगुलियों से धीरे-धीरे से पकड़कर, ऊपर का सिरा बांये हाथ से पकड़कर धीरे -धीरे (मट्ठा बिलोने की तरह) प्रारभ्भ में 10 से 20 बार घर्षण करते हैं एवं इसी तरह बायें नथुने से किया जाता है।

यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्रारंभ में 3 नं. की रबर नली से किया जाना चाहिए। यदि नेति करते समय खाँसी आये तो नली हिलाना तब तक बन्द रखें जब तक खाँसी बंद न हो जाये। नकली दांत और चश्मे को उतारना न भूलें। बिना योग चिकित्सक से पूछे रबर नेति नहीं करनी चाहिए। रबर नेति करते समय यदि दो चार बूंद खून आ जाये तो बिना घबराएं तेल नेति कर लें। ठीक हो जायेगा।

रबर नेति करने वाले रात को सोते समय घृत या तेल नेति अवश्य करें। यदि भूल जायें तो रबर नेति से पूर्व तेल नेति अवश्य करें। अधिक कष्ट में प्रातः खाली पेट एवं शाम को भोजन से पूर्व भी कर सकते हैं। योग शिक्षक या चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही यह नेति करें। रबर नेति के बाद सूत्र नेति (धागे की बनी) करना अच्छा है।

एम.आर. बादशाह(स्वास्थ्य दर्पण)

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