पायरिया से बचिए सांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
संजीवनी

पायरिया से बचिए

दांतों की सेहत

दांतों का एक बहुत ही प्रचलित रोग है पायरिया। यह रोग आधुनिक सभ्यता की देन है।

डिब्बों में बंद खाद्य पदार्थ, शक्कर, मैदा, पालिश वाले चावलों की ओर ज्यों-ज्यों

हमारा आकर्षण बढ़ रहा है त्यों-त्यों इस रोग के रोगियों की संख्या भी बढ़ती जा रही

है।

पायरिया की रोकथाम के लिए भोजन में क्षार की मात्रा भी होनी चाहिये। जो चोकरदार

आटा, दूध ताजे पके फल व हरी कच्ची तरकारियों में अधिक मात्रा में होता है। यदि

इसका ध्यान रखा जाये तो यह रोग कभी नहीं होगा।

अक्सर लोग कहा करते हैं कि चीनी खाने से दांत खराब होते हैं यह काफी अंशों में सही

बात है। गन्ने के रस से जहां चीनी बनती है तो उसमें कैल्शियम का अंश नहीं रह

जाता और चीनी कैल्शियम के साथ के बिना पचती नहीं।

चीनी के पाचन के लिए कैल्शियम हड्डियों से खिंचकर आता है। फलतः हड्डियों के सारे

ढांचे पर प्रभाव पड़ताप है किन्तु दांत बाहर होने के कारण उसका प्रभाव उन पर

प्रत्यक्ष दिखायी देता है। अतः दांतों के रोग समाप्त करने हैं तो भोजन में कैल्शियम

की समुचित मात्रा होनी चाहिए जो हरी तरकारियों जैसे फूलगोभी, टमाटर, लौकी,

गाजर, खीरा, पालक, संतरा, तिल व दूध में अधिक मात्रा में पाया जाता है।

और अंगों की तरह दांतों की कसरत भी आवश्यक है जो हलवा पूरी खाने से नहीं अपितु

कच्ची तरकारियां खाने से अथवा दोपहर-शाम मुट्ठी भर भिगोये हुये गेहूं चना लेने से

हो सकती है। अंकुरित गेंहू और भी लाभप्रद है। अंकुरित गेंहू में विटामिन ’ई‘ होता है

जो बांझपन, नपुंसकता, जख्म जल्दी न भरना आदि रोगों में बहुत ही लाभप्रद है।

सुबह उठते समय व रात को सोने से पहले दांत अवश्य साफ करें।

बाजारू दवाएं लगाकर दांतों को निकम्मा न बनायें अपितु सेंधा नमक मिला सरसों का

तेल अथवा नींबू का रस लगाना काफी होगा।

भोजन के बाद मूली, गाजर, ककड़ी, सेब, अमरूद जैसी किसी कड़ी चीज का अवश्य

सेवन करें। फल व तरकारियों का क्षार दांतों को साफ करता है। इनका कोई अंश

दांतों में रह भी जाये तो इतनी जल्दी नहीं सड़ता।

इस तरह यह प्रयोग करने से पायरिया की बीमारी तो समाप्त होगी ही, साथ ही दांतों

की पीड़ा, दांतों का हिलना मसूड़ों की खराबी आदि भी समाप्त हो जायेगी।

वंदना सिंह (स्वास्थ्य दर्पण)

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