जूस स्वास्थ्य के लिए एक उत्तम आहार है। यह आसानी से पच जाता है। बूढ़े और बच्चों जिनके दांत नहीं होते, वे फल और कच्ची सब्जी तो खा नहीं सकते। उनके लिए जूस एक आसान साधन होता है विभिन्न विटामिनों की कमी को दूर करने का। आइए जानें, कौन सा फल, सब्जी का जूस किस प्रकार हमें लाभ पहुंचाता है-
जब थकान हो, हवाई सफर के बाद, रात की शराब के बाद तो हैंगओवर उतारने के लिए सबसे अच्छा जूस-सेब, संतरा, या गाज़र, चुकन्दर का जूस होता है।
जब शरीर में शिथिलता महसूस हो, ऐसे में सेब व अनानास का जूस शरीर में स्फूर्ति प्रदान करता है।
तनाव कम करने के लिए-टमाटर, गाजर, धनिया पत्ती, ब्रोकली और सेलरी के पत्रों का मिक्स जूस दिमाग को रिलेक्स करता है।
पाचन क्रिया में सुधार लाने के लिए सेब या चुकन्दर, गाजर, अदरक का जूस नियमित पीना चाहिए।
रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए सेब का रस अति उत्तम होता है और सब्जियों में गाजर, अदरक, नींबू का रस मिला कर कुछ दिनों तक नियमित लें।
शरीर की शुद्धि के लिए सेब, मौसमी, तरबूज और अदरक का रस मिला कर लें।
लिवर की सफाई के लिए चुकन्दर, नींबू, गाजर और अनानास का जूस बहुत अच्छा होता है।
त्वचा की स्फूखत के लिए गाजर और पालक के रस का नियमित सेवन करें।
जूस बनाने से पहले ध्यान में रखे कुछ बातें
जूस हमेशा ताजे फल और सब्जियों का बनाएं।
फल और सब्जियां कहीं से गली हुई न हों। यदि कोई भाग थोड़ा ढीला है तो उसे काट कर फेंक दें नहीं तो जूस नुकसान पहुंचा सकता है।
जूसर को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।
सब्जियां और फल जूस निकालने से पहले अच्छी तरह धो लें ताकि फल सब्जियों पर किसी प्रकार का संक्रमण न रहे नहीं तो वो भी जूस के साथ आपके शरीर में चला जाएगा।
पालक की डंडियां भी जूस निकालते समय प्रयोग में ला सकते हैं पर गाजर के पत्ते और डंडियों का जूस न निकालें क्योंकि गाजर के पत्ते और डंडियां विषाक्त (जहरीली) होती हैं।
नींबू, संतरे, मौसमी के बीज जूस में न पिसने दें। इससे जूस कड़वा लगता है। इसी प्रकार सेब के बीज भी पहले निकाल लें।
मौसमी, संतरे, नींबू के छिलकों का जूस में प्रयोग न करें।
संतरे, मौसमी के सफेद गूदे वाले भाग को न फेंकें। इसमें विटामिन सी होता है।
जूस निकालने के बाद आप जूस में काली मिर्च, नमक, छोटी इलायची नींबू का रस या धनिया पत्तियां डाल कर उसके स्वाद को अधिक बढ़ा सकते हैं। नीतू गुप्ता(स्वास्थ्य दर्पण)