आए दिन बच्चे गिरते पड़ते रहते हैं और उन्हें चोटें लगती रहती हैं। छोटी मोटी बीमारियों के कारण आप खुद और बच्चे भी परेशान हो जाते हैं। रोज ही कोई न कोई शिकायत होती है। कभी पेट दुखता है तो कभी कान में कुछ फंस जाता है । यदि ज्यादा चाकलेट खा ली हो तो दांत दुखते हैं।
इन सब रोज होने वाली छोटी-मोटी तकलीफों को आप घर पर ही ठीक कर सकते हैं लेकिन सावधानी से।
यदि घरेलू इलाज से सुधार न हो तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं। हम तो केवल आपको वे आजमाई हुई बातें बता रहे हैं जिनसे आप यकीनन छोटी-मोटी तकलीफों को खुद ही दूर कर सकते हैं ताकि इन रोज लगने वाली चोटों से आपको मानसिक तनाव पैदा न हो।
यदि खेलते समय बच्चे गिर पड़ते हैं तो सबसे पहले यह जानकारी हासिल करें कि चोट सिर पर तो नहीं लगी। सिर पर लगी चोट अवश्य डॉक्टर को ही दिखायें। यदि घुटनों पर या कोहनी पर चोट लगी है और खरोंच आयी है या खून बह रहा है तो सबसे पहले उसे साफ पानी से धो लें। यदि आपके पास ‘आरनिका‘ (एक होमियोपैथिक) दवाई का टिंचर है तो इसकी कुछ बूंदें पानी में घोल कर, चोट को इससे साफ करें।
फिर यदि घाव गहरा नहीं है तो कोई अच्छी मलहम जैसे डेटोल या आरनिका इत्यादि लगाकर पट्टी बांध दें लेकिन यदि घाव गहरा है तो डॉक्टर को दिखायें। खून रुकने पर पट्टी खोल दें और जख्म को हवा में सूखने दें। गीला रहने से वह ठीक होने में ज्यादा समय लेगा।
कभी-कभी छोटे बच्चों व शिशुओं के पेट में हवा भरने के कारण दर्द होता है और वे अचानक जोर से रोते हैं। ऐसा होने पर, शिशु को ध्यान से अपने घुटनों पर पेट के बल (औंधा करके) लिटायें। अब धीरे धीरे उसकी पूरी पीठ मलें। थोड़ी देर में बच्चा हवा छोड़ेगा और उसे तुरन्त आराम मिलेगा।
यदि बड़े बच्चे पेट में दर्द की शिकायत करें तो हो सकता है कि उन्हें कोई खाना न पचा हो। ऐसे में उन्हें गुनगुने पानी के साथ थोड़ी-सी अजवाइन और काला नमक मिलाकर दें।
यदि आपके बच्चे ने कुछ उल्टा सीधा खा लिया है और उसे मामूली दस्त लग जाते हैं तो एक या दो दिन तक उसे हल्की खिचड़ी, लौकी व मूंग की दाल इत्यादि खिलाइये। दस्त को रोकने का एक सरल उपाय है कि आप ठंडे पानी के साथ ईसबगोल लें। याद रहे कि दस्त लगने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए आपको नींबू, पानी, चीनी व नमक का घोल बनाकर बार-बार बच्चे को पिलाना चाहिये।
कभी कभी खेल-खेल में बच्चों के कान में कीड़ा या फिर कोई कचरा फंस जाता है। ऐसे में नानी मां का नुस्खा याद करें। थोड़ा सा सरसों का तेल गर्म करें, इसके थोड़ा गुनगुना होने पर रूई का फाहा इसमें भिगो कर एक, दो बूंदें कान में डालें। इससे कचरा या कीड़ा बाहर आएगा।
यदि नाक में कुछ फंसा है तो काली मिर्च सुंघायें। इससे बच्चे को छीकें आएंगी और नाक में फंसी चीज बाहर आएगी। यदि ऐसा न हो तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
यदि आपके बच्चे के गले में कुछ फंस गया है तो देर न करें। उसे पहले तो दो तीन केले खिला दें। जो भी चीज फंसी है, वह केलों में लिपट जाएगी और पेट में पहुंचकर खरोंच भी नहीं लगेगी लेकिन ऐसे में सावधानी बरतनी जरूरी है। बेहतर होगा कि आप डॉक्टर को ही दिखायें।
गरमी में अक्सर बच्चों को घमौरियां हो जाती हैं। ऐसे में एक बाल्टी पानी में सोडा बाईकार्ब मिलाकर उसे नहलाएं। बदन को सुखा कर कैलामाइन लोशन लगायें या घमोरियों वाला खास पाउडर छिड़कें। ऐसे में बच्चों को हल्के-फुल्के सूती कपड़े पहनायें।
बच्चों के पेट में कीड़े अक्सर गंदगी की वजह से होते हैं। वे मिट्टी में खेलते रहते हैं और फिर उन्हीं हाथों से खाना खाते हैं। नाखूनों में फंसी मैल और कीड़े खाने में प्रवेश करके पेट में जाते हैं और इसी से बीमारियां हो जाती हैं, इसलिए बच्चे के नाखून हमेशा छोटे काट कर, साफ रखें। यदि आप इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देंगे तो आप इन रोज-रोज की परेशानियों का मुकाबला आसानी से कर सकते हैं। अम्बिका (स्वास्थ्य दर्पण)