प्रकृति ने हमें जितने प्रकार के उपहारों से निहाल बनाया है, उनमें दृष्टि का स्थान
सर्वोच्च है। इस महत्त्वपूर्ण उपहार की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य हेतु हमें यथेष्ट रूप से सजग
रहना पड़ता है।
स्वस्थ आंखों का मतलब सिर्फ आंखों की सही दृष्टि से नहीं अपितु दोष रहित आंखों से
है। आंखों में शीघ्र थकान न आना, पीलापन न आना, आंखों का गोलक गड्डे में धंसा
हुआ न होना स्वस्थ आंखों के प्रमाण हैं। साथ ही पुतलियों, पलकों के नीचे झुर्रियां भी
नहीं रहनी चाहिए। आंखें स्वच्छ-निर्मल, धवल एवं चमकदार हों तो स्वस्थ कही जायेंगी।
संतुलित और पौष्टिक आहार से शरीर के सभी अंग अवयव बलिष्ठ होते हैं किंतु आंखों
के लिए कुछ विशेष रूप से उत्तरदायी ऐसे आहार तत्व चिकित्सा विज्ञानियों द्वारा खोज
निकाले गए हैं जिनकी यदि उपेक्षा होती रहे, तो आंखों की ज्योति पर प्रतिकूल प्रभाव
पड़ता है। हमारी आंखें स्वस्थ रहें, इसके लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान रखना
चाहिए-
-आंखें साफ, निर्मल एवं सदैव स्वच्छ रहें, इस पर हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
आंखों की प्रकृति ठंडक पसंद है, अतः नित्य सुबह उठकर ठंडे पानी से साफ करना न
भूलें। साफ गिलास में पानी लेकर चुल्लू भरकर आंखों पर हल्के छींटे मारें। ध्यान रहे
कि पलकें झपकें नहीं। यह क्रम पांच सात बार कर लेने से आंखें स्वच्छ एवं स्वस्थ
अनुभूत होने लगती हैं।
-आंखों को धूल एवं गर्मी से बचाए रखने के लिए सप्ताह में दो बार विशेष मेहनत
करनी चाहिए। इसके लिए एक बाल्टी साफ पानी में सांस रोककर अपने सिर को उस
पानी में इतना डुबाया जाये कि आंखें, नाक, मुंह सभी पूरी तरह से डूब जायें। अब उसी
पानी के अन्दर आंखें खोलने, बंद करने और पुतलियों को इधर-उधर घुमाने का प्रयत्न
करें। जब सांस लेना हो तो सिर बाहर कर लें। दो-चार बार ऐसा अभ्यास करने से आंखें
भली-भांति स्वच्छ और शीतल हो जाती हैं।
-नेत्र चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार विटामिन ’ए‘ नेत्रों के लिए अच्छा होता है। हमारी
आंखों के ’रेटिना‘ दोषों में जो प्रतिक्रिया होती है उसके लिए विटामिन ’ए‘ की प्रचुर मात्रा
में उपस्थिति आवश्यक है। विटामिन ’ए‘ की कमी से रतौंधी होने लगती है। आंखों की
कंजक्टाइवा के कोष मोटे, परतदार और सूखे हो जाते हैं और अपनी चमक खो देते हैं।
आंखों से पानी बहने लगता है। धूप में कुछ भी देख पाना मुश्किल हो जाता है तथा
अन्त में अपनी नेत्र ज्योति खो बैठता है। अतः विटामिन ’ए‘ युक्त भोजन यथा दूध,
मक्खन, टमाटर, गाजर, हरी शाक, सब्जी आदि का विशेष रूप से सेवन करना चाहिए।
-आंखों को स्वच्छ एवं सशक्त बनाये रखने में त्रिफला जल काफी गुणकारी है। किसी
साफ-सुथरे मिट्टी के पात्र या स्टील के बर्तन में एक दो चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात्रि
में एक गिलास पानी में भिगो दिया जाये और प्रातःकाल उससे स्वच्छ हाथों से आंखें
धोने से आंखों की सफाई के साथ प्राकृतिक पोषण भी उन्हें मिलता रहेगा।
-आंखों को निद्रा से विश्राम मिलता है, अतः पूरी नींद लेने में कोताही न बरती जाये।
चौबीस घण्टों में कम से कम छः-सात घण्टे सोने से आंखें चुस्त एवं दुरुस्त बनीं रहती
हैं।
-आंखों को कमजोर और बीमार बनाने के प्रमुख साधन टेलीविजन और कंप्यूटर का
अति प्रयोग भी है, अतः उसे देखते समय एक टक न देखें और कंप्यूटर पर अधिक देर
काम न करें।
-आंखों से बारीक काम लेते समय भी उन्हें बीच-बीच में आराम दिया जाना जरूरी है।
यदि पढ़ाई कर रहे हैं या सिलाई, कढ़ाई कर रहे हैं तो सामान्यतः 20 मिनट बाद काम
बंद करके थोड़ी देर तक दोनों हाथों की हथेलियों से आंखें बंद रखने से उनकी थकान दूर
हो जाती है।
-यदि आंखें थकी-थकी सी लग रही हों तो गुलाब जल मिश्रित पानी में साफ रूई भिगो
कर आंखों पर रखने से राहत मिलती है और तरोताजगी महसूस होती है।
-सुबह के समय आधी खुली आंखों से कुछ सेकण्ड तक सूर्य के प्रकाश को देखना और
फिर आंखें बंद करना तथा रात्रि में चन्द्रमा के साथ भी इस प्रक्रिया की पुनरावृत्ति करना
आंखों का उत्तम व्यायाम है।
-नेत्र चिकित्सक के सलाहानुसार ही चश्मे का प्रयोग करना श्रेयस्कर होता है। गलत
शीशे का प्रभाव आंखों पर बुरा पड़ता है। रवीन्द्र झा(स्वास्थ्य दर्पण)