अनेक रोाग दूर करता है लहसुन अनेक रोाग दूर करता है लहसुन
संजीवनी

अनेक रोग दूर करता है लहसुन

आहार

लहसुन तामसिक भोजन की वस्तु होने पर भी गुणों से भरपूर है। अब तो चिकित्सा जगत में भी इसका काफी नाम है। बच्चे तक गार्लिक के नाम से परिचित हैं क्योंकि इसके फ्लेवर के कई खाद्य पदार्थ बाजार में उपलब्ध हैं जैसे गार्लिक ब्रेड, गार्लिक चीज, गार्लिक नूडल्स, गार्लिक चिप्स, गार्लिक चिकन आदि। पुराने समय में तो मजदूर लोग लहसुन की चटनी के साथ रोटी खा लेते थे क्योंकि उन्हें मेहनत अधिक करनी पड़ती थी। इससे उनका शरीर ताकतवर और स्वस्थ रहता था।

लहसुन में अपने ही प्रकार की एक विशिष्ट तीखी गंध होती है जिससे कच्चा खाने में थोड़ी कठिनाई होती है। तीखी गंध होने के बावजूद इस में कई रोगों को दूर करने की क्षमता होती है। भारत के आयुर्वेदाचार्यों ने इसके दिव्य गुणों से वैज्ञानिकों को परिचित करवाया और अब यह कंद अपने गुणों के कारण अपनी पहचान का मोहताज नहीं है बल्कि सारे संसार में लोकप्रिय है। लहसुन आंवले के बाद ऐसा खाद्य पदार्थ है, जिसे कच्चा, पक्का या घी में भुना, किसी भी प्रकार से सेवन करना उचित है।

घरों में प्रायः लहसुन का प्रयोग सब्जी के मसाले के रूप में किया जाता है। वैसे इसका अचार, इसके द्वारा बनी चटनी या चटनी में इसे मिला कर खाने का भी अपना ही मजा है। घरों में लहसुन हरा और सूखा, दोनों प्रकार का प्रयोग में लाया जाता है। हरे लहसुन के पत्ते साग में पकाकर खाने से साग का स्वाद दुगुना हो जाता है।

लहसुन घरेलू प्रयोग में तो साग, सब्जी, दाल, चटनी, अचार के स्वाद को ही बढ़ाता है परन्तु इसके चिकित्सीय गुणों को आम लोग पूरी तरह नहीं समझते। आयुर्वेद के अनुसार लहसुन टूटी हड्डी जोड़ने में सहायक, पित्त एवं रक्तवर्द्धक, वीर्यवर्द्धक, कफ नष्ट करने वाला, वायु प्रकोप कम करने में और पेट के कीड़े मारने आदि में दवा के रूप में सहायक है। लहसुन में कई रासायनिक तत्व भी मौजूद हैं।

गला बैठने पर लहसुन का रस कुनकुने पानी में मिलाकर गरारे करने से गला साफ होता है।

जी मिचलाने पर हरे लहसुन की चटनी लाभप्रद है।

वायु बनने पर लहसुन की कुछ कलियां गर्म दूध में डालकर अच्छी तरह दो गिलासों की सहायता से हिला डुला लें। दूध छान कर पी लें और कलियां कच्ची चबा लें। रात भर ठंडे जल का सेवन न करें। ताजा या कुनकुना जल पीएं।

छोटे बच्चों के गले में लहसुन की कलियों की माला बनाकर डालने से ठंड और खांसी से बचाव होता है। सर्दियों में इसकी माला डालें जो छाती को छूती रहे।

संक्रामक रोग फैलने पर सोने के कमरे में, शौचालय तथा रसोईघर में लहसुन छीलकर इधर उधर रख दें। इसकी तीखी गंध से वायु में जो संक्रामक कीटाणु होंगे, वे नष्ट हो जाएंगे।

पेट में कीड़े होने पर लहसुन के रस को पानी में मिलाकर एनिमा करने से मरे हुए कीड़े दस्त के जरिए बाहर निकल जाएंगे।

प्रातः 4 से 6 कलियां लहसुन खाने या निगलने से वायु विकार व पेट दर्द में राहत मिलती है। इसका प्रयोग लगातार न करें। अधिक से अधिक चार पांच दिन लें। पेट के अल्सर वाले रोगी कच्चे लहसुन का प्रयोग न करें।

लहुसन का रस कटे हुए छोटे घावों पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

कफ वाले रोगी को अदरक, नींबू, नमक, जीरा, सौंफ, अनारदाना, लहसुन की चटनी पीसकर दिन में थोड़ी-थोड़ी दो बार एक सप्ताह तक चटाने से बलगम बाहर निकलता है।

अपच व अफारा होने पर खाना खाने से पूर्व लहसुन की ताजी 4 कलियां नमक के साथ खाने से पेट में अफारा नहीं उठता।

सावधानियांः- वैसे लहसुन का सेवन अति उत्तम माना जाता है पर किसी भी चीज की अधिकता नुकसान पहुंचा सकती है। किसी भी रूप में आप लहसुन का सेवन कर रही हैं पर उसे लगातार न लें क्योंकि लहसुन गर्म और खुश्क अधिक होता है। थोड़ी मात्रा में मसाले के रूप में प्रतिदिन खाना नुकसान नहीं पहुंचाता। कच्चा खाने से पूर्व डॉक्टर या वैद्य की सलाह अवश्य लें

गर्मी के मौसम में लहसुन का उपयोग काफी कम मात्रा में करें। पित्त प्रधान प्रकृति वाले इसका प्रयोग काफी संतुलन में करें। जिन दिनों हरा लहसुन उपलब्ध हो, उन दिनों उसका प्रयोग करें। वैसे अब लहसुन की गोलियां और कैप्सूल भी उपलब्ध हैं पर अपनी इच्छा से शुरू न करें वैद्य की राय लेना उचित होता है। जिन लोगों का शरीर लहसुन को हज़म न कर पाए, उन्हें लहसुन का सेवन छोड़ देना चाहिए। सुनीता गाबा(स्वास्थ्य दर्पण)

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