मधुर, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : डायबिटिक फुट अल्सर से जूझ रहे मरीजों के लिए चिकित्सा जगत से एक बड़ी उम्मीद सामने आई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ऐसे ‘फेज कॉकटेल’ हाइड्रोजेल पर काम कर रही है, जिसे डायबिटिक फुट अल्सर के संक्रमित घाव पर लगाया जा सकेगा। यह जेल उन बैक्टीरिया को निशाना बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है, जो सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुके हैं। ICMR के निदेशक डॉ. शांतसबुज दास ने बताया कि डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज में एंटीबायोटिक के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इन्हीं विकल्पों में फेज थेरेपी भी शामिल है। फेज ऐसे विशेष वायरस होते हैं, जो बैक्टीरिया को पहचानकर उन पर हमला करते हैं और उन्हें नष्ट कर सकते हैं।
बैक्टीरिया को पहचानकर करेगा हमला
फेज सबसे पहले संबंधित बैक्टीरिया की पहचान करता है। इसके बाद वह बैक्टीरिया की कोशिका से जुड़कर अपना आनुवंशिक पदार्थ उसके भीतर पहुंचाता है। आगे चलकर फेज बैक्टीरिया की कोशिका की मशीनरी पर कब्जा कर लेता है और बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है। इसी तकनीक को डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज में इस्तेमाल करने के लिए शोधकर्ता फेज कॉकटेल विकसित कर रहे हैं। इसमें एक नहीं, बल्कि अलग-अलग बैक्टीरिया को निशाना बनाने वाले कई फेज शामिल होंगे।
डायबिटिक फुट अल्सर क्यों है गंभीर समस्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मधुमेह के मरीजों में लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से नसों पर असर पड़ सकता है। इससे पैरों में संवेदना कम हो जाती है। ऐसे में पैर में चोट लगने या कोई बाहरी वस्तु चुभने पर मरीज को तुरंत पता नहीं चलता। समय पर इलाज न मिलने से छोटा-सा घाव संक्रमण का रूप ले सकता है। मधुमेह के कारण घाव भरने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है और संक्रमण गंभीर हो सकता है। डायबिटिक फुट अल्सर की एक बड़ी चुनौती यह है कि इसमें कई प्रकार के बैक्टीरिया एक साथ मौजूद हो सकते हैं। इसे पॉलीमाइक्रोबियल संक्रमण कहा जाता है। इसके अलावा कई मामलों में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं।
गंभीर संक्रमण में पैर काटने तक की नौबत
विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस डायबिटिक फुट अल्सर में गंभीर चुनौती बन चुका है। दवाओं से संक्रमण को नियंत्रित करना मुश्किल होने पर स्थिति बिगड़ सकती है। संक्रमण शरीर में फैलने पर सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति भी पैदा हो सकती है। गंभीर मामलों में मरीज का पैर काटने तक की नौबत आ सकती है।
घाव पर लगाया जाएगा फेज कॉकटेल
ICMR की परियोजना का उद्देश्य फेज को सीधे संक्रमित घाव पर इस्तेमाल करना है। इसके लिए फेज कॉकटेल को हाइड्रोजेल के रूप में तैयार किया जा रहा है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसे डायबिटिक फुट अल्सर के घाव पर लगाया जाएगा और उसके ऊपर सामान्य तरीके से पट्टी की जा सकेगी। यह फेज कॉकटेल घाव में मौजूद लक्षित बैक्टीरिया पर हमला कर उन्हें नष्ट करने के लिए काम करेगा। इस तरह भविष्य में यह एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमण से निपटने के लिए एक वैकल्पिक उपचार का रास्ता खोल सकता है। हालांकि, इस तकनीक को मरीजों के नियमित इलाज में शामिल करने से पहले इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा की वैज्ञानिक जांच जरूरी होगी। यदि शोध सफल रहता है, तो एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज में यह एक महत्वपूर्ण नई दिशा साबित हो सकती है।