आज के समय में दांतों के अनेक रोग हैं जो बहुतायत से फैले हुए हैं। इनमें दांतों का
दर्द, दांतों का पीला होना, पायरिया तथा दांतों का हिलना आदि प्रमुख हैं। दांतों की
मजबूती व स्वास्थ्य कैसे बना रहेगा, इस बारे में बहुत से लोगों को जानकारी नहीं
होती। अनेक लोग ऐसे भी होते हैं जो जानते हुए भी आलस्य के कारण दांतों की
पर्याप्त देखभाल नहीं कर पाते।
दरअसल आमतौर पर लोग यह भी सोच लेते हैं कि सुबह स्नान से पहले दांतों की
किसी भी तरह सफाई कर लेने से ही दांतों को स्वस्थ रखने के प्रयत्न पूर्ण हो जाते
हैं लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। लोग दांतों की सफाई नियमित रूप से करते हैं,
फिर भी दांतों की बीमारियों से परेशान रहते हैं। इसी से यह ज्ञात होता है कि मात्रा
दांतों की सफाई ही सब कुछ नहीं है और प्रयत्न करने भी लाज़मी हैं, तभी दांतों की
सुरक्षा बनी रह सकती है।
प्रायः लोग खाने-पीने के मामलों में यह नहीं देखते कि हम जो कुछ खा-पी रहे हैं, वह
कितना कुछ फायदा या नुकसान पहुंचा सकता है। गरमा-गरम चाय पी, तभी अगर
आइसक्रीम खाने की इच्छा हुई तो तत्काल आइसक्रीम भी खा ली। इस समय यह
नहीं सोचा कि अभी-अभी गर्म चाय पी है। यदि इसके बाद आइसक्रीम खाई तो दांतों
पर बुरा असर पड़ेगा और वे कमजोर हो जायेंगे।
कई बार लोग उत्साह में आकर कोई कठोर चीज दांतों से चबा डालते हैं। उस समय वे
यह नहीं सोचते कि इस कठोरता से दांतों की कठोरता कम हो जाएगी। इस तरह के
कार्य यद्यपि तत्काल तो नहीं लेकिन धीरे-धीरे असर डालकर अपना कुप्रभाव दिखाते
रहते हैं। जब रोगी यह समझ लेता है कि उसके दांतों में तकलीफ रहने लगी है, तब
भी वह तब तक चिकित्सा के लिए तत्पर नहीं होता जब तक परेशानी ज्यादा नहीं हो
जाती।
इससे यह प्रतीत होता है कि लोग आमतौर पर दांतों के प्रति उदासीन ही रहते हैं जबकि
ये भी शरीर और स्वास्थ्य के साथ-साथ सौन्दर्य के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। मजबूत दांत
जहां भोजन को ठीक तरह से चबाने में सक्षम होते हैं, वहीं कमजोर और हिलते हुए
दांत न तो भोजन को ही चबा पाते हैं और न ही सौन्दर्य को बनाये रखने में ही
सक्षम होते हैं। इसके कारण पेट के भी अनेक रोग जन्म लेते हैं।
दांतों की मजबूती और सुन्दरता को बनाये रखने में स्वास्थ्य का बहुत बड़ा हाथ होता
है। इस संबंध में कुछ सुझाव दिये जा रहे हैं जिनको अपनाने से दांतों का स्वास्थ्य
और सौन्दर्य, दोनों ही बना रहते हैं।
नित्य प्रातः रात्रि को सोने से पहले दांतों की ठीक तरह से सफाई करें। इसके अलावा
प्रत्येक भोजन के बाद अच्छी तरह कुल्ला करें ताकि अन्न कण दांतों में फंसे न रहें।
इसके लिए ‘माउथवाश‘ का भी गुनगुने पानी के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
कभी भी एक समय में ही गरम और ठण्डे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए तथा
कठोर वस्तुओं को भी नहीं चबाना चाहिए।
मल- मूत्र को त्यागते समय ऊपर-नीचे के दांतों को भींच कर रखने से दांत कमजोर
नहीं हो पाते। दांतों की सफाई के साथ ही मसूड़ों की मालिश भी अंगुली से नियमित रूप से करते रहनी चाहिए।
चूना, कत्था एवं तम्बाकू के सम्पर्क से भी दांत खराब होने लगते हैं।
दांतों के कमजोर होने के बाद भी उनकी मजबूती के लिए प्रयत्न करना चाहिए तथा
उखड़वाने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। दांतों के हिलने की शिकायत होने पर
आवश्यक उपचार के साथ-साथ गुनगुना किया हुआ सरसों का तेल कान में डालना
चाहिए। इसके अलावा षटबिन्दु तेल को नाक में डालकर नस्य भी लेते रहना चाहिए।
यूं तो दांतों का रोग आयुर्वेद के अनुसार वायु विकार से उत्पन्न होता है, लेकिन इसमें
चीनी या मिश्री का शर्बत पीने से लाभ होता है। दांत हिलने की शिकायत शुरू होते
ही मौलसिरी की छाल से दातुन करने, इसका क्वाथ मुंह में भरकर कुल्ला करने तथा
इसके छाल को चबाने से भी लाभ मिलता है। दांतों के हिलने में तिल और बालवच
को चबाने से भी फायदा पहुंचता है।
हिलते हुए दांतों के लिए नागरमोथा, हरड़, वायविडंग, त्रिकटु (सोंठ, कालीमिर्च, पीपल
समान मात्रा में) और नीम के सूखे पत्ते सबको समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर
नीम के पत्तों के रस में मिलाकर छोटी-छोटी गोली बनाकर रख लें। जिस रोगी के
दांत हिलते हों, वह एक गोली मुंह में रखकर सो जाये। कुछ दिनों तक ऐसा करने
पर दांतों का हिलना बंद हो जाता है और वे मजबूत हो जाते हैं।
माजूफल को पीसकर दांतों पर मलने से दांतों से रक्त आना बंद हो जाता है तथा वे
मजबूत हो जाते हैं। सिरस का गोंद और काली मिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीसकर
दांतों पर मलने से भी दांत मजबूत होते हैं। भुनी फिटकरी, कत्था, तथा भुना हुआ
तूतिया को पीसकर एक चुटकी इस मिश्रण को लेकर दांतों पर मलते रहने से भी दांत
मजबूत होते हैं।
सूखा धनिया का चूर्ण 20 ग्राम, गुलाब के सूखे फूल 10 ग्राम, चन्दन का बुरादा 10
ग्राम को लेकर कूट पीसकर, छानकर, मिलाकर रख लें। इसमें तीन ग्राम कपूर
मिलाकर एक शीशी में रख लें। इस मंजन की मालिश करते रहने से मसूड़ों का
फूलना, दांतों का हिलना, दांतों में दर्द होना, खून निकलना आदि बीमारियां ठीक हो
जाती हैं। पूनम दिनकर(स्वास्थ्य दर्पण)