कोलकाता : स्तन कैंसर के उपचार, शोध और जागरूकता को लेकर कोलकाता में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर का सेंट गैलेन इंटरनेशनल ब्रेस्ट कैंसर कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया। महानगर के एक पांच सितारा होटल में सम्मेलन की मेजबानी हुई, जिसमें भारत और विदेशों के प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट और विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन में 10 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी सदस्य, 200 से अधिक राष्ट्रीय विशेषज्ञ और 500 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन के जरिए स्तन कैंसर के उपचार में नई तकनीकों, शोध और मरीजों तक बेहतर उपचार पहुंचाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि सेंट गैलेन सम्मेलन स्तन कैंसर के क्षेत्र में दुनिया के सबसे प्रभावशाली मंचों में से एक है, जहां वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर उपचार संबंधी दिशानिर्देश तय किए जाते हैं, जिनका प्रभाव वैश्विक स्तर पर देखा जाता है। सम्मेलन के दौरान एक हालिया अध्ययन का भी उल्लेख किया गया, जिसके अनुसार भारत में 1990 से 2023 के बीच स्तन कैंसर के मामलों में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। 1990 में जहां प्रति एक लाख महिलाओं में 13 मामले सामने आते थे, वहीं 2023 में यह बढ़कर 29.4 प्रति एक लाख हो गया है। इस मौके पर ‘प्रोजेक्ट पिंक आर्मी’ की भी शुरुआत की गई, जो कैंसर जागरूकता और मरीजों को सहयोग देने के लिए समाज आधारित स्वयंसेवी अभियान होगा। यह पहल आईबीडीके की पूर्व परियोजना ‘प्रोजेक्ट पिंक अलर्ट’ का विस्तार है, जिसके तहत छात्रों के लिए आयोजित ऑनलाइन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में 1.8 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया था और इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था।
सम्मेलन का एक प्रमुख शैक्षणिक आकर्षण 100 से अधिक वैज्ञानिक शोध सार और 30 से ज्यादा शोध प्रस्तावों की प्रस्तुति रहा। चयनित शोध परियोजनाओं को अनुदान भी प्रदान किया गया, जबकि पांच युवा शोधकर्ताओं को 2027 में वियना में होने वाले अगले सेंट गैलेन सम्मेलन में अपने शोध प्रस्तुत करने के लिए चुना गया। सम्मेलन के दौरान एशियन कैंसर कंसेंसस मीट भी आयोजित की गई, जिसमें एशिया क्षेत्र में कैंसर उपचार से जुड़ी चुनौतियों और क्लीनिकल प्रश्नों पर चर्चा की गई। इसके निष्कर्षों को एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।
इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रेस्ट डिज़ीज़ेस, कोलकाता के निदेशक डॉ. सौमेन दास ने कहा कि इस सम्मेलन के कोलकाता में आयोजन से भारतीय चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को वैश्विक शैक्षणिक संवाद के केंद्र में स्थान मिला है। वहीं डॉ. तन्मय कुमार मंडल ने कहा कि यह पहल शोध को प्रोत्साहन देने, युवा वैज्ञानिकों को समर्थन देने और क्षेत्रीय स्तर पर कैंसर उपचार को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से कोलकाता वैश्विक स्तर पर कैंसर उपचार और शोध के क्षेत्र में उभरते केंद्र के रूप में सामने आया है।
स्विट्ज़रलैंड के सेंट गैलेन से आए प्रो. बीट थुर्लिमान ने कहा कि स्तन कैंसर के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रगति का लाभ दुनिया के हर मरीज तक पहुंचना चाहिए और ऐसे मंच वैश्विक विशेषज्ञों और विभिन्न स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में काम कर रहे डॉक्टरों के बीच सहयोग को मजबूत करते हैं। पेरिस के प्रो. एटियेन ब्रेन ने कहा कि कैंसर उपचार की क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। वहीं स्विट्ज़रलैंड के प्रो. जेंस हाउबर ने कहा कि स्तन कैंसर के इलाज में सर्जरी, रेडिएशन और दवा आधारित उपचार के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है।