पूरी नींद लेना बहुत जरूरी हे 
संजीवनी

पूरी नींद लेना बहुत जरूरी है

नींद और आराम का चोली दामन का साथ है। काम के बाद थकान, फिर नींद, इसमें अवरोध नहीं आना चाहिए। नींद एक प्रकार का टॉनिक है जो ताजगी और नई जिंदगी देता है। बच्चे हो या बूढ़े, नींद सबके लिए जरूरी है। जवान आदमी के लिए 6 घंटे पर्याप्त होते हैं जबकि बूढ़े लोग 3-4 घंटे ही सो पाते हैं लेकिन बच्चों को तो 8 से 10 घंटे सोने के लिए चाहिए। नवजात शिशु पलक झपकते ही सो जाते हैं। एक साल से 5 साल तक के बच्चों को 10 घंटे तथा 5 से 10 साल तक के बच्चों को आठ घंटे तक सोना जरूरी है।

अधिकांश माता- पिता अपने साथ अपने बच्चों को भी जगाते रहते हैं। देर रात तक भोजन करना और टी.वी. देखना नशे की तरह लोगों की आदतों में शामिल हो गया है।

हांगकांग में हाल ही में कराए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि 5 साल से बारह साल तक की उम्र वाले 80 प्रतिशत स्कूली बच्चे पढ़ाई के बोझ, गृहकार्य एवं टी.वी. देखने के कारण लगभग 6 घंटे ही सो पाते हैं। भारत में भी यही हाल है। अधिकांश माता- पिता अपने साथ अपने बच्चों को भी जगाते रहते हैं। देर रात तक भोजन करना और टी.वी. देखना नशे की तरह लोगों की आदतों में शामिल हो गया है। बच्चे तो बच्चे हैं। उन्हें तो हर नई खबर में दिलचस्पी रहती है। जब मां-बाप टी.वी. देखते रहेंगे तो बच्चों को मना नहीं कर सकते।

एक तो स्कूल का होमवर्क और दूसरा घर में देर रात तक जागकर टी.वी. देखना, दोनों के कारण बच्चों के मस्तिष्क पर भारी बोझ रहता है, फलतः देर सवेर बच्चे शारीरिक एवं मानसिक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं।

बच्चों पर इसका बहुत बुरा असर होता है। एक तो स्कूल का होमवर्क और दूसरा घर में देर रात तक जागकर टी.वी. देखना, दोनों के कारण बच्चों के मस्तिष्क पर भारी बोझ रहता है, फलतः देर सवेर बच्चे शारीरिक एवं मानसिक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। बच्चों को योग्य बनाना जरूरी है लेकिन उसके लिए ठूंस-ठूंस कर जानकारी भरना महंगा पड़ सकता है। उचित यही होगा कि बच्चे की दिनचर्या को व्यवस्थित किया जाये। उन्हें उचित आहार, व्यायाम, खेलकूद, स्वच्छता, सदाचार की शिक्षा दें लेकिन उन्हें नींद पूरी लेने दें। आप नहीं सो सकते तो न सोएं, पर बच्चों को तो चैन से सोने दें। -संजय कुमार चतुर्वेदी (स्वास्थ्य दर्पण)

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