एचसीजी कैंसर सेंटर, कोलकाता में फॉलो-अप परामर्श के बाद डॉ. करण सहगल के साथ मरीज रत्ना माया पिबांग राई और उनकी बेटी शेरॉन राई 
संजीवनी

कोलकाता में रोबोटिक सर्जरी से भूटान की मरीज को मिली कैंसर से जंग में नई उम्मीद

Madhur

मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पैंसठ वर्षीय रत्ना माया पिबांग राय ने एक दशक से अधिक समय तक बार-बार होने वाले दस्त और स्पष्ट निदान के अभाव में परेशान रहने के बाद आखिरकार सीमा पार कोलकाता में अपनी बीमारी का सही उपचार और स्वस्थ होने की राह पाई। कोलकाता स्थित एचसीजी कैंसर सेंटर में उनकी रोबोटिक-सहायता प्राप्त लो एंटीरियर रेक्शन सर्जरी की गई। यह कोलकाता में भूटान के किसी मरीज पर की गई पहली ज्ञात रोबोटिक कैंसर सर्जरी थी। भूटान के दगाना की निवासी रत्ना माया वर्ष 2010-11 से कई अस्पतालों का दौरा कर चुकी थीं और अनेक जांचों से गुजर चुकी थीं। इस वर्ष की शुरुआत में थिम्फू में हुई कोलोनोस्कोपी में उनके मलाशय में कैंसर का पता चला। भूटान के सर्वोच्च तृतीयक चिकित्सा संस्थान जिग्मे दोरजी वांगचुक राष्ट्रीय रेफरल अस्पताल के माध्यम से उन्हें आगे के उपचार के लिए एचसीजी कोलकाता रेफर किया गया। मलाशय के कैंसर सहित कोलोरेक्टल कैंसर भारत में 2024 में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसर में चौथे स्थान पर था। ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, 2024 में इसके लगभग 83,577 नए मामले सामने आने का अनुमान था।

एचसीजी में विस्तृत जांच के बाद रत्ना माया के मध्य और ऊपरी मलाशय में एडेनोकार्सिनोमा की पुष्टि हुई। उन्हें पहले ऑपरेशन से पूर्व रेडियोथेरेपी दी गई और उसके बाद दोबारा जांच की गई। इसके आधार पर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. करण सहगल तथा उनकी टीम ने ऐसी सर्जरी की योजना बनाई, जिसमें ट्यूमर को पूरी तरह हटाने के साथ-साथ प्राकृतिक मलत्याग का मार्ग सुरक्षित रखा जा सके और स्थायी स्टोमा की आवश्यकता से बचा जा सके। डॉ. सहगल ने कहा, “मलाशय को सुरक्षित रखना और प्राकृतिक रूप से आंतों की कार्यप्रणाली बनाए रखने की संभावना हमारे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी। रोबोटिक सर्जरी ने श्रोणि के सीमित स्थान में अत्यधिक सटीकता के साथ ऑपरेशन करने में मदद की और पेट में बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।”

रत्ना माया को मधुमेह, उच्च रक्तचाप और एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी थीं। ऑपरेशन से पहले उनकी विस्तृत हृदय संबंधी जांच और सावधानीपूर्वक एनेस्थीसिया योजना बनाना बेहद महत्वपूर्ण था। एचसीजी कैंसर सेंटर, कोलकाता की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मौमिता भौवाल ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

27 जुलाई को रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान लगभग 8 मिलीमीटर के छोटे छिद्रों के माध्यम से रोबोटिक उपकरण डाले गए और ट्यूमर को निकालने के लिए केवल एक छोटा चीरा लगाया गया। सर्जरी के बाद रत्ना माया जल्द ही चलने-फिरने लगीं और उनकी रिकवरी अच्छी रही। उन्हें 1 अगस्त को स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद उन्होंने बाह्य रोगी विभाग में जांच कराई और 7 अगस्त को अपने परिवार के साथ भूटान के लिए रवाना हो गईं। एचसीजी कैंसर हॉस्पिटल्स की आरबीएच डॉ. रुपाली बसु के अनुसार, यह सफल उपचार सीमा पार समन्वित कैंसर चिकित्सा के व्यापक उद्देश्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “इस मामले में विशेषज्ञ चिकित्सा, सावधानीपूर्वक एनेस्थीसिया योजना और रोबोटिक सर्जरी की सटीकता एक साथ आई। इसका उद्देश्य केवल कैंसर को हटाना नहीं था, बल्कि प्राकृतिक शारीरिक कार्यों को सुरक्षित रखना और मरीज को बेहतर आत्मविश्वास तथा जीवन की गुणवत्ता के साथ अपने घर लौटने में मदद करना भी था।”

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