संजीवनी

भविष्य की सर्जरी: मणिपाल हॉस्पिटल्स में रोबोटिक सिमुलेशन वर्कशॉप का आयोजन

नई पीढ़ी की तकनीक से रोगी-केंद्रित उपचार पर फोकस

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : शल्य चिकित्सा का भविष्य आज केंद्र में रहा, जब मणिपाल हॉस्पिटल्स कोलकाता ने एक विशेष रोबोटिक सिमुलेशन कार्यशाला के माध्यम से आने वाले कल की स्वास्थ्य सेवाओं की झलक प्रस्तुत की। चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और शिक्षा जगत की अग्रणी प्रतिभाओं को एक मंच पर लाते हुए इस कार्यक्रम ने रोबोटिक-सहायता प्राप्त शल्य चिकित्सा की दुनिया का गहन अनुभव प्रदान किया और यह प्रदर्शित किया कि नवाचार, सटीकता और मानवीय विशेषज्ञता किस प्रकार मिलकर रोगी देखभाल को नई दिशा दे रहे हैं।

"भविष्य यहीं है – मणिपाल हॉस्पिटल्स में रोबोटिक शल्य चिकित्सा के साथ" विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में शल्य चिकित्सा उत्कृष्टता के नए युग को रेखांकित किया गया, जहां उन्नत रोबोटिक तकनीक सर्जनों को अधिक सटीकता, बेहतर नियंत्रण और उत्कृष्ट परिणामों के साथ जटिल शल्य प्रक्रियाएं करने में सक्षम बना रही है।

कार्यक्रम की शुरुआत मणिपाल हॉस्पिटल्स ईस्ट के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अयनाभ देबगुप्ता के स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि का सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) दिलीप कुमार प्रतिहार, पीएचडी (आईआईटी कानपुर), एफएनएई, एफआईई, एसएमआईईईई, एमएएसएमई, एवीएच फेलो, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, यांत्रिक अभियंत्रण विभाग, आईआईटी खड़गपुर मुख्य अतिथि तथा प्रो. (डॉ.) सुष्मिता मित्रा, पीएचडी (आईएसआई, कोलकाता), एफआईईईई, एफटीडब्ल्यूएएस, एफएनए, एफएनएई, एफएनएएससी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

रोबोटिक तकनीक के चिकित्सीय उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. कुणाल सरकार, निदेशक – हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा, मणिपाल हॉस्पिटल, मुकुंदपुर क्लस्टर ने हृदय, वक्ष एवं रक्तवाहिका शल्य चिकित्सा तथा सामान्य शल्य चिकित्सा में रोबोटिक्स की भूमिका पर चर्चा की। वहीं डॉ. सौरव दत्ता, निदेशक – मणिपाल समग्र कैंसर देखभाल, मणिपाल हॉस्पिटल्स मुकुंदपुर, साल्ट लेक एवं सिलीगुड़ी क्लस्टर ने कैंसर शल्य चिकित्सा में रोबोटिक-सहायता प्राप्त तकनीकों की नवीन प्रगति पर अपने विचार साझा किए।

इसके अतिरिक्त डॉ. विकास कपूर, क्लस्टर निदेशक – अस्थिरोग विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल्स मुकुंदपुर क्लस्टर ने अस्थिरोग शल्य चिकित्सा, डॉ. अभय कुमार, निदेशक – मूत्ररोग एवं मूत्रजननांग कैंसर विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास तथा वरिष्ठ सलाहकार – मूत्ररोग विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर, ब्रॉडवे एवं साल्ट लेक ने मूत्ररोग एवं मूत्रजननांग कैंसर उपचार तथा डॉ. अरुणव रॉय, विभागाध्यक्ष – स्त्री रोग कैंसर विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास एवं वरिष्ठ सलाहकार – स्त्री रोग कैंसर विभाग, ब्रॉडवे एवं साल्ट लेक ने स्त्री रोग संबंधी शल्य चिकित्सा में रोबोटिक्स की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान मणिपाल हॉस्पिटल्स साल्ट लेक क्लस्टर की नई रोबोटिक शल्य चिकित्सा टीम का भी परिचय कराया गया। इस टीम में डॉ. देबकुमार राय, वरिष्ठ सलाहकार – जठरांत्र शल्य चिकित्सा, मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे; डॉ. अभिनिबेश चटर्जी, वरिष्ठ सलाहकार – प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल साल्ट लेक; डॉ. अभिषेक भौमिक, सलाहकार – उन्नत लैप्रोस्कोपिक शल्य चिकित्सक, मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे; डॉ. पॉली चटर्जी, वरिष्ठ सलाहकार – प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग; डॉ. अरिजीत सिंघा महापात्र, सलाहकार – शल्य जठरांत्र रोग विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे तथा डॉ. सुजॉय चटर्जी, विभागाध्यक्ष – हृदय एवं रक्तवाहिका शल्य चिकित्सा विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे शामिल हैं। यह टीम विभिन्न विशेषज्ञताओं में उन्नत रोबोटिक-सहायता प्राप्त शल्य चिकित्सा सेवाओं का नेतृत्व करेगी।

अपने संबोधन में प्रो. (डॉ.) दिलीप कुमार प्रतिहार ने कहा, "रोबोटिक्स और उन्नत प्रौद्योगिकियों का समावेश चिकित्सा विज्ञान में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। इससे शल्य चिकित्सा की सटीकता, कार्यकुशलता और रोगियों के उपचार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है। डॉक्टरों के साथ मेरी चर्चा से मुझे यह समझने का अवसर मिला कि वेलिस, दा विंची एक्सआई, रोसा और माको जैसी रोबोटिक प्रणालियां विभिन्न शल्य विशेषज्ञताओं में अधिक सटीकता और बेहतर चिकित्सीय निर्णय लेने में किस प्रकार सहायता कर रही हैं। यह अभियंत्रण और स्वास्थ्य सेवा के बीच बढ़ते समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां नवाचार अधिक व्यक्तिगत, कम आक्रामक और प्रभावी उपचार संभव बना रहा है।"

अपने संबोधन में प्रो. (डॉ.) सुष्मिता मित्रा ने कहा, "स्वास्थ्य सेवा का भविष्य चिकित्सा और प्रौद्योगिकी के निर्बाध सहयोग में निहित है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स चिकित्सकों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें अधिक सटीकता, बेहतर उपचार परिणाम और रोगियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए सशक्त बनाने के लिए हैं। जैसे-जैसे ये तकनीकें विकसित होंगी, इन्हें नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और मानवीय विवेक के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मैं मणिपाल हॉस्पिटल्स की सराहना करती हूं कि उन्होंने चिकित्सकों, अभियंताओं, वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर ज्ञान के आदान-प्रदान और बहु-विषयक सहयोग को बढ़ावा दिया है। भविष्य की स्वास्थ्य सेवा वही लोग तय करेंगे जो चिकित्सीय उत्कृष्टता को तकनीकी नवाचार के साथ जोड़कर अधिक सुरक्षित, बुद्धिमान और रोगी-केंद्रित उपचार प्रदान करेंगे।"

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रोबोटिक सिमुलेशन प्रयोगशाला रही, जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने किया। उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों ने माको, वेलिस, रोसा और दा विंची एक्सआई जैसी रोबोटिक प्रणालियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। अस्थिरोग शल्य चिकित्सा में माको (स्ट्राइकर), वेलिस (डीप्यू सिंथेस) और रोसा (जिमर बायोमेट) जैसी प्रणालियां जोड़ प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं को अधिक सटीक, व्यक्तिगत योजना आधारित और सही प्रत्यारोपण स्थिति निर्धारण के माध्यम से नई दिशा दे रही हैं। वहीं दा विंची एक्सआई प्रणाली विभिन्न विशेषज्ञताओं में कम चीरे वाली जटिल शल्य प्रक्रियाओं को अधिक नियंत्रित और प्रभावी बना रही है। इस प्रदर्शन ने दर्शाया कि रोबोटिक तकनीक चिकित्सा विज्ञान को अधिक सटीक, कुशल और रोगी-केंद्रित बना रही है।

कैंसर शल्य चिकित्सा में रोबोटिक तकनीक की बढ़ती भूमिका पर डॉ. सौरव दत्ता ने कहा, "रोबोटिक तकनीक जटिल कैंसर शल्य प्रक्रियाओं में अधिक सटीकता और बेहतर नियंत्रण प्रदान कर रही है। इससे कठिन स्थानों पर स्थित ट्यूमर की शल्य चिकित्सा अधिक प्रभावी हुई है तथा रक्तस्राव, शल्योपरांत दर्द और स्वस्थ होने में लगने वाले समय में कमी आई है। उन्नत रोबोटिक प्रणालियों और बहु-विषयक विशेषज्ञता के माध्यम से हमारा प्रयास कैंसर रोगियों के लिए अधिक सुरक्षित शल्य चिकित्सा और बेहतर उपचार परिणाम सुनिश्चित करना है।"

अस्थिरोग शल्य चिकित्सा में रोबोटिक्स की भूमिका पर डॉ. विकास कपूर ने कहा, "रोबोटिक-सहायता प्राप्त अस्थिरोग शल्य चिकित्सा ने जोड़ प्रत्यारोपण में सटीकता और व्यक्तिगत उपचार का नया मानक स्थापित किया है। बेहतर प्रत्यारोपण स्थिति और शल्य योजना के कारण रोगियों को कम दर्द, शीघ्र पुनर्वास और बेहतर गतिशीलता का लाभ मिल रहा है। पिछले दो वर्षों में मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास में 1,500 से अधिक रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण शल्य प्रक्रियाएं करने के बाद हमने तकनीक आधारित अस्थिरोग उपचार के सकारात्मक परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से देखा है।"

स्त्री रोग संबंधी शल्य चिकित्सा में रोबोटिक्स की भूमिका पर डॉ. अभिनिबेश चटर्जी ने कहा, "रोबोटिक-सहायता प्राप्त शल्य चिकित्सा स्त्री रोग उपचार में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। इससे सर्जन अधिक सटीकता, बेहतर दृश्यता और अधिक नियंत्रण के साथ जटिल शल्य प्रक्रियाएं कर पा रहे हैं। कम आक्रामक तकनीकों के कारण शल्य आघात कम होता है, रोगी जल्दी स्वस्थ होते हैं और व्यक्तिगत उपचार योजनाएं संभव हो पाती हैं, जिससे रोगियों को बेहतर अनुभव और बेहतर उपचार परिणाम प्राप्त होते हैं।"

कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष प्रदर्शन, विशेषज्ञों के साथ संवाद और व्यावहारिक सिमुलेशन अनुभवों के माध्यम से रोबोटिक शल्य चिकित्सा की सटीकता, क्षमता और संभावनाओं को निकट से समझने का अवसर मिला। इस पहल के माध्यम से मणिपाल हॉस्पिटल्स ने उन्नत चिकित्सा नवाचारों को रोगियों तक पहुंचाने तथा सटीकता-आधारित शल्य चिकित्सा के भविष्य को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

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