स्मरण शक्ति सांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
संजीवनी

स्मरण शक्ति कैसे बढ़ाएं

मानसिक स्वास्थ्य

कई लोगों को अपनी तेज़ याददाश्त पर बड़ा मान होता है तो कई बेचारे अपने

भुलक्कड़पन से परेशान रहते हैं। प्रोफेसर और दार्शनिक तथा कवि अपने भुलक्कड़पन

के लिए अच्छे खासे बदनाम हैं।

द्वारिकाजी कविता खूब करते हैं। अच्छी या बुरी यह अलग बात है लेकिन कवि के नाम

से प्रसिद्ध हैं। साथ ही वे अपने भुलक्कड़पन के लिये भी उतने ही जाने जाते हैं।

श्रीमती जी बाजार तेल लेने भेजती हैं तो चावल ले आते हैं, साबुन मंगाती हैं तो तेल

ले आते हैं। आलम यह है कि कविताओं की धुन में दुकान तक पहुंचते-पहुंचते वे यह

बात भूल जाते हैं कि वे क्या लेने आये थे।

प्रमिलाजी कामकाजी महिला है। सुबह-सुबह उनकी बहुत भागदौड़ रहती है। स्वयं ऑफिस

जाने की तैय्यारी करना, पतिदेव का, बच्चों का नाश्ता, लंच तैयार करना आदि काम

एक साथ करते-करते कई बार ऐसा होता है कि फ्रिज़ तक कुछ लेने पहुंचती हैं तो

कुछ देर वहीं खड़ी रह जाती हैं यह याद करती कि क्या लेने आई थीं।

याद न रख पाने को लोग भुलक्कड़पन से जोड़ कर देखते हैं। आयु अधिक होने पर

बुढ़ापे को इसका कारण मान लिया जाता है लेकिन मनोवैज्ञानिकों के अनुसार आपकी

उम्र कुछ भी क्यों न हो, आप भी अपनी स्मृति बार-बार अभ्यास करके बढ़ा सकते

हैं।

अच्छी स्मरण शक्ति की कोई सीमा नहीं। कुछ लोगों को न जाने कितने लोगों के फोन

नंबर कंठस्थ होते हैं तो कुछ लोग पेज पर एक बार नजर डालकर ही उस पर लिखा

याद कर लेते हैं लेकिन आम आदमी बहुत जल्दी भूलता है। कुछ तो यह जरूरी है

नहीं तो जीना मुश्किल हो जाए।

यदि कोई बात हम दिमाग में ठीक से जमाकर रखते हैं (अलमारी में व्यवस्थित तह

किए कपड़ों की तरह) तो उसे दुबारा निकालना कठिन न होगा लेकिन बेतरतीब ठूंसी

हुई चीजे़ं ढूंढना जितना कठिन है उसी तरह याद रखना। याददाश्त एक बहुत जटिल

प्रक्रिया है क्योंकि उसका संबंध आपके मूड, स्थान व परिस्थति आदि पर भी निर्भर

करता है और वैसी ही स्थिति निर्मित होने पर आपको सब याद आ जाता है वर्ना

सब कुछ भूल जाते हैं।

दिमाग की तुलना इसीलिए कम्प्यूटर से की जाती है क्योंकि यहां भी मेमोरी में डालने

के लिए फीड करना पड़ता है। उसका भी कोड होता है।

याददाश्त की तीन अवस्थाएं हैं सही फीडिंग और दिमाग में उसका पंजीयन, दूसरी उसे

अल्पकालीन या दीर्घकालीन खाने में जमा करना, तीसरी उसे रीकाल करना। बुढ़ापे में

सुनने, देखने व महसूस करने आदि की क्षमता कम होने के कारण सही फीड नहीं

होता। ज्यादा दवाओं के लेने-नींद न आने, तनावग्रस्त चिंतित रहने की स्थिति में भी

याद रखने की फीडिंग क्षमता घट जाती है। आपकी पहले की स्मृति एक हैंगर की

तरह काम करेगी जिस पर आप वर्तमान की किसी बात को टांगकर दिमाग में

महफूज़ रख सकती हैं।

स्मृति को ताजा रखने के लिए उसे ध्यान देकर दोहराना जरूरी है। इसके लिए सबसे उपयुक्त समय है सोने से पहले। याद करते, दोहराते नींद भी बढ़िया आती है और इस तरह आप अनिद्रा के रोगी होने से बच जाते हैं।

मेमोरी बढ़ाने का दावा करने वाली कई दवाएं मार्केट में आ रही हैं। लोग इनकी तरफ

आकर्षित भी होते हैं। जड़ी बूटियों से बनने वाली ऐसी कई दवाओं की भारत ही नहीं

बल्कि विदेशों में भी मांग रहती है। इनका सिर्फ मनोवैज्ञानिक असर ही होता है, ठीक

तंत्र मंत्र की तरह। बाकी इनमें कोई असर करने जैसा कुछ हो, यह सिर्फ

खामखयाली ही है।

सबसे बढ़िया बात है रैग्युलर दिमागी व्यायाम, मैंटल वर्कआउट और प्रसन्नचित्त रहने की

आदत। एकाकीपन, उदासी, सोच, बोरियत और मेंटल लेथार्जी (मानसिक सुस्ती)

दिमागी कार्यवाही पर नकारात्मक असर डालते हैं। इसी तरह अगर दिमाग ओवरवर्क

करता रहे तो उससे भी ’रिट्रोग्रेड एमनेशिया) (कुछ समय के लिये स्मृति लाॅस) जैसी

स्थिति पैदा हो जाती है।

मेडिटेशन के द्वारा दिमागी सुकून प्राप्त किया जा सकता है। दिमाग को आखिर आराम

की भी जरूरत होती है।

उम्र कुछ भी हो, कुछ व्यायामों द्वारा दिमागी शक्ति बढ़ाई जा सकती है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार कुछ बातों को फालो करके आप अपनी याददाश्त तेज कर

सकते हैं जिनमें एक सीधा सरल फार्मूला है उस बात को किसी पिछले के साथ जोड़ें

जो आपको याद हो।

आप काल्पनिक चित्र दिमाग में बनायें और फिर उसे किसी चीज से जोड़ें। आंकड़े याद

रखने के लिए अक्षरों को याद रखने की सलाह दी जाती है। आप चीजों को, बातों को

तार्किक ढंग से क्रम से व्यवस्थित कीजिए और याद रखना चाहते हैं तो दोहरा

लीजिए।

समझकर याद की गई बात ठीक से याद होती है इसलिए आप जो याद करना चाहते हैं

उसे पहले समझ लें।

जिस विषय को याद करना चाहते हैं, उसमें रुचि लीजिए, उसे एक खास क्रम में

संग्रहित कीजिए। तर्क और विशेष अर्थ से संजोयी चीज आपके दिमाग में उन बातों

से ज्यादा समय तक रहेगी जो बिना किसी क्रम के दिमाग में भरी हैं।

अगर आपको बहुत सी बातें याद करनी हैं तो उसको थोड़ा-थोड़ा करके कई दिनों में याद

कीजिए। कई बार दोहराने से बातें दिमाग में अच्छी तरह बैठ जाती हैं।

जो बात याद करनी है, उसे उसी तरह की अन्य बातों से मिलाइए जो आपकी मेमोरी में

हैं। उषा जैन ’शीरीं‘(स्वास्थ्य दर्पण)

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