घर-बाहर में बैलेंस रख के चलना कोई आसान काम नहीं है, खासकर तब जब आपकी कार्यावधि लंबे समय तक की हो और आपके पास समय की कमी रहती हो। काम चाहे कोई भी हो, वक्त तो मांगता ही है चाहे आप डॉक्टर हों, इंजीनियर हों, मीडिया प्रोफेशनल हों, एक्टर हों या बिजनेसमैन हों या किसी भी क्षेत्रा में हों, लेकिन आज की भागदौड़ वाली तेज रफ्तार जिंदगी जैसा जुमला हर समय सुनने कहने के बावजूद निराश होने की जरूरत नहीं है। स्थिति इतनी बुरी भी नहीं हो गई है कि उसे लेकर कुछ किया न जा सके।
कुछ कार्यकलाप ऐसे जरूर हैं जो आपका तनाव दूर कर आपमें फिर से ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। कुछ अति व्यस्त विशिष्ट लोगों से बात करके हमने यह जाना कि वे लोग काम की व्यस्तता के बावजूद कैसे घर और काम के बीच बैलेंस बना के रखते हैं। रिसर्च एनालिस्ट परेश भागवत का मानना है कि समय मिलता नहीं, निकालना पड़ता है। कार्यभार से उपजा तनाव अनेक समस्याओं को ही जन्म नहीं देता बल्कि कार्यालय में आपके परफॉरमेंस पर भी बुरा असर डालता है। सप्ताह में छह दिन कार्य करना, वो भी बारह-बारह घंटे आसान नहीं होता और महीने के अंत तक प्रेशर इतना बढ़ जाता है कि लगता है यह भी कोई जीना है। अपनी मर्जी का कोई काम करने को वक्त ही नहीं। मनोरंजन के लिये भी तरस कर रह जाओ।
बेहद तनावपूर्ण कार्यों में लगे लोगों के लिए यौगिक व्यायाम और संगीत सुनना उन्हें रिलैक्स कर तनावमुक्त करते हैं। तनावमुक्ति के साधन लोगों के कार्य अनुसार विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं। उदाहरण के लिये बैठे-बैठे कार्य करने वालों के लिए कार्य के बाद व्यायाम उपयुक्त होगा लेकिन ऐसा कार्य करने वालों के लिये जिन्हें शारीरिक मेहनत करनी पड़ती हो, इधर से उधर भागदौड़ करनी पड़ती हो, अच्छा है कि वे घर आकर आराम करें। प्रसिद्ध मनोविशेषज्ञ डॉक्टर समीर पारिख के अनुसार आपको अपना फॉर्मूला अपनी ऐज ग्रुप, हॉबी और किस तरह का काम है, नजर में रखकर ढूंढना है। अहम बात यह है कि कोई फार्मूला हो तनावमुक्ति के लिए।
पढ़िए, संगीत सुनिए, नृत्य करिए। आउटिंग पर जा सकते हैं। रूटीन ब्रेक करने के लिए वो सब करिए जो आपको खुशी देता है। ऑफिस और उसकी समस्याओं को कुर्सी छोड़ते ही भूल जाइए। अपनी घरेलू और कार्यालय की जिन्दगी को समृद्ध करने के लिए दोनों में बैलेंस बनाकर चलिए। (उर्वशी)उषा जैन शीरीं