अब संक्रमण के आधार पर होगा इलाज सांकेतिक तस्वीर
संजीवनी

अब लक्षण नहीं, संक्रमण के आधार पर होगा मरीज का इलाज, आईसीएमआर की नई पहल

नयी दिल्ली : डॉक्टरों की ओर से दवा लिखने के तरीके में बदलाव होने की संभावना है। खबरों की मानें तो आने वाले समय में बुखार, खांसी, दस्त या सांस लेने की तकलीफ में केवल लक्षण देखकर दवा देने का तरीका बदलने जा रहा है। दवा देने से पहले चिकित्सक यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि बीमारी के पीछे कौन सा वायरस या बैक्टीरिया है। इसके बाद उस संक्रमण से संबंधित दवा दी जाएगी।

ऐसा क्यों होगा ?

दरअसल, माना गया है कि ऐसा करने से मरीज को बेवजह दवाएं नहीं खानी पड़ेंगी और एंटीबायोटिक के सेवन से भी बचा जा सकेगा। कई बार केवल लक्षण देखकर दवा देने के कारण मरीजों को बेवजह की दवाएं खानी पड़ती हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

आईसीएमआर की योजना क्या है ?

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने संक्रमण की जांच के लिए एक प्राथमिक सूची तैयार की है जिसके अनुसार, चिकित्सकों द्वारा मरीज के लक्षण को देखने के बाद किस संक्रमण की जांच करानी चाहिए, इसके बारे में कहा गया है । रपटों के अनुसार आईसीएमआर की ओर से इस सूची को दुनियाभर के कई बड़े डॉक्टर, लैब एक्सपर्ट और महामारी विशेषज्ञों के साथ 40 से अधिक बैठकों और चर्चा के बाद तैयार किया गया है।

सूची में ये वायरस रखे गए हैं

आईसीएमआर की ओर से बनाई गई इस सूची में सबसे अहम है अचानक या बिना किसी कारण के आने वाला बुखार । इसमें 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और 14 दिन या उससे कम समय का बुखार शामिल है। ऐसे बुखार से जूझ रहे मरीजों में प्राथमिकता 1ए में मलेरिया के परजीवी, डेंगू वायरस, टाइफाइड और पैराटाइफाइड के बैक्टीरिया समेत कई वायरस रखे गए हैं ।

कैसे तय होगी प्राथमिकता ?

बुखार के साथ शरीर पर दाने निकलें तो जांच की दिशा बदल जाएगी। इसमें खसरा, रूबेला, स्क्रब टाइफस और दूसरे रिकेट्सियल संक्रमण, डेंगू, चिकनपॉक्स से जुड़ा वायरस, हर्पीज, हाथ-पैर-मुंह की बीमारी वाला एंटरोवायरस और जीका जैसे संक्रमणों को प्राथमिकता दी गई है।

अगर बुखार के साथ शरीर पर दाने आएं, तो बदल जाएगा जांच का तरीका

सूची के अनुसार, अगर मरीज को आए बुखार के साथ शरीर पर दाने भी निकल रहे हैं, तो जांच का तरीका बदल जाएगा। ऐसे मामले में चिकित्सकों को कुछ अन्य इन्फेक्शन की जांच को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इस प्रकार के मामलों में रूबेला, डेंगू, चिकनपॉक्स, खसरा, हर्पीज, जीका और हाथ-पैर-मुंह की बीमारी से जुड़ी बीमारी जैसे इन्फेक्शन की जांच शामिल है।

बुखार के साथ अगर सूजन हो, तो इन कारणों पर होगी नजर

आईसीएमआर की ओर से तैयार की जा रही सूची के अनुसार, अगर बुखार के साथ गर्दन या शरीर के दूसरे हिस्सों में लसीका ग्रथियां, तो इसके पीछे कई प्रकार के संक्रमण की बात हो सकती है। ऐसे स्थिति में एपस्टीन-बार वायरस, साइटोमेगालोवायरस, स्क्रब टाइफस, ब्रुसेला, मेलियोइडोसिस से जुड़े बैक्टीरिया जैसे कारणों की जांच को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

बुखार के साथ बेहोशी की स्थिति में यह जांच होगी

आईसीएमआर की ओर से ऐसे मरीजों की पहचान की प्राथमिकता भी तय की गई है, जिनमें बुखार के साथ दिमाग से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई दिए। कई बार इन परिस्थितियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे मामलों में मलेरिया, स्क्रब टाइफस और रिकेट्सियल संक्रमणों की जांच को प्राथमिकता दी गई है ।

233 रोगजनक कारकों को विभिन्न श्रेणियों में रखा गया

आईसीएमआर की ओर से कुछ रोगजनक कारकों को विभिन्न प्राथमिकता की क्षेणियों में बांटा गया है। इसके अंतर्गत प्राथमिकता 1A में ऐसे संक्रमण रखे गए हैं जिनकी पहचान इलाज शुरू करने से पहले काफी अहम मानी जाती है। इसके बाद 1B, 2 और 3 जैसी श्रेणियां आती हैं, जिनमें दुर्लभ या विशेष निगरानी वाले रोगजनक कारकों को शामिल किया गया है। पूरी सूची में 233 रोगजनक कारकों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है।

SCROLL FOR NEXT