कहते हैं जल ही जीवन है। इसके बावजूद प्रकृति की इस अमूल्य नियामत का हम खुलकर दुरुपयोग करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार हर छठा व्यक्ति नियमित सुरक्षित जल आपूर्ति से वंचित है तथा 2050 तक हर चौथा व्यक्ति स्वच्छ जल से वंचित होगा। हम जानते हैं कि हमारे शरीर का एक बड़ा भाग पानी से बना है। पानी में विटामिन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम जैसे बहुत से महत्वपूर्ण खनिज तत्व होते हैं जो शरीर को स्वस्थ व मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
हम कई दिनों तक खाए बिना रह सकते हैं पर पानी के बिना रहना मुश्किल है। पानी की जरूरत शरीर के चयापचय पाचन क्रिया और Absorption के लिए काफी आवश्यक है। शरीर से वेस्ट यानी यूरिया, पोटैशियम और सोडियम जैसे तत्व निकालने और टेंपरेचर मेंटेन रखने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। कितने गिलास पानी हमें रोज पीना चाहिए, यह एक यक्ष प्रश्न है।
चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि कम से कम 5 से 10 गिलास पानी रोज पीना चाहिए । पानी का महत्व हमारे शरीर में ऑक्सीजन के बाद दूसरे स्थान पर है। पसीना, मूत्र और शरीर के मैटाबोलिज्म फंक्शन के कारण शरीर से पानी कम होता है। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से त्वचा की प्राकृतिक चमक एवं नमी बरकरार रहती है। पानी की कमी से हाई ब्लड प्रेशर, डिहाइड्रेशन, इंफेक्शन जैसी परेशानियां आम हैं। डाइजेस्टिव सिस्टम भी ठीक से कार्य नहीं कर पाता। सिरदर्द, थकान कॉन्सन्ट्रेशन में कमी भी देखने में आती है।
पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन कब्ज नहीं होने देता। यह अंतड़ियों की प्राकृतिक नमी व लोच को बरकरार रखता है जिससे शौच क्रिया आसानी से होती है।
पानी शरीर के जोड़ों तथा मांसपेशियों के लिए आवश्यक चिकनाई तथा लचीलेपन को बरकरार रखता है व्यायाम के पहले और बाद में पानी पीने से मांसपेशियों की ऐंठन तथा थकान दूर होती है। पानी शरीर में मौजूद सभी हानिकारक टॉक्सिन बाहर लाता है ।
प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से गुरदे तथा हृदय रोग नहीं होते।
महिलाओं को पानी ज्यादा से ज्यादा पीना चाहिए क्योंकि उनमें यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन होने के चांस काफी ज्यादा होते हैं। दरअसल महिलाओं का यूरेथरा काफी छोटा होता है जिसके कारण इन्हें इंफेक्शन का खतरा रहता है। इसे कम करने के लिए पानी की पूर्ति काफी आवश्यक है, इसलिए महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए।
जरूरत के अनुसार शरीर में पानी की पूर्ति हो तो इसके कई फायदे हैं
लोमालिंडा यूनिवर्सिटी कैलीफोर्निया के एक शोध के अनुसार प्रत्येक दिन 5 से 10 ग्लास पानी पीने वाले लोगों को हार्ट अटैक या हृदय संबंधी अन्य रोगों से मरने की संभावना प्रत्येक दिन 2 से 3 गिलास पानी पीने वालों के मुकाबले कम होती है। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा गर्भाशय, गुरदे तथा मूत्राशय के संक्रमण को रोकती है। इससे गुरदे में पथरी भी नहीं होती।
गर्भावस्था के दौरान अधिक पानी का सेवन न केवल बहुत से साइड इफेक्ट्स से बचाता है बल्कि इस दौरान आने वाले शारीरिक बदलावों से निबटने में मदद करता है। जैसे गर्भावस्था के 8वें महीने में स्त्री का खून गाढ़ा होने लगता है। यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए नुकसानदेह है। गाढ़ा खून हाइपरटेंशन तथा दिल की अन्य बीमारियों को बढ़ाता है।
लिहाजा गर्भवती महिला को हर हाल में प्रत्येक दिन 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।
गर्भावस्था में अधिक पानी के सेवन से त्वचा की स्निग्धता बनी रहती है। मुंहासों से मुक्ति मिलती है और सोडियम की अतिरिक्त मात्रा बाहर आती है। गर्भपात की संभावना भी कम होती है।
(स्वास्थ्य दर्पण)संजय कुमार ’सुमन‘