आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में दूसरों की सफलता या खुशी में हृदय से मुस्कुराना जितना कठिन हो गया है, उतना ही आसान है ईश्वर द्वारा दिया गया यह अनमोल रत्न-'हंसी'।
लेकिन ज़रा सोचिए, गंभीर होने का नाटक करने से क्या हासिल होता है? चेहरों पर तनाव की लकीरें और दिल में ईर्ष्या... जबकि एक छोटी सी मुस्कान हमारे जीवन का सारा बोझ हल्का कर सकती है।
क्रोध करने में : चेहरे की लगभग 34 मांसपेशियों को मेहनत करनी पड़ती है।
मुस्कुराने में : केवल 17 मांसपेशियों का उपयोग होता है! यानी मुस्कुराना क्रोध करने से कहीं ज्यादा आसान और सेहतमंद है।
मई-जून की तपती धूप में भी किसी की प्यारी सी मुस्कान मन में बसंत ले आती है। तो फिर तनाव को कहें अलविदा और आज ही इस कला को अपनाएं।
आइए, मुस्कुराएं और एक तनावमुक्त जीवन जीएं !
(स्वास्थ्य दर्पण)राजेन्द्र मौर्य