म्यूजिक थेरेपी 
संजीवनी

ध्वनि प्रदूषण के दौर में म्यूजिक थेरेपी

Om Prakash Mishra

स्वर ब्रह्म को मनाने वाले भारत में जन्म हो या मृत्यु, खुशी हो या गम, संगीत ’बैकग्राउंड‘ का काम करता है। हम अपने कृष्ण भगवान को बांसुरी वाला कहते हैं। भारत का शास्त्रीय संगीत प्राचीन काल से ही अद्भुत परिणाम देता आया है। पुरातन रागों ने हमेशा ब्रह्मांड को झंकृत कर देवताओं को पृथ्वी पर उतरने को विवश किया है। वेदों में (सामवेद) जिन मंत्रों का सृजन किया गया, उनकी अपनी लय और अपने रिद्म हैं और उन्हें उन्हीं रागों में उच्चारित करने का शास्त्र है जिन रागों में वे रचे गए।

संगीत : एक संपूर्ण औषधि

हमारे देश में संगीत ऐसी औषधि का काम करता है जो पूर्ण स्वास्थ्य देता है। पूर्ण स्वस्थ साधक ही उच्च साधना कर सकता है। यही नहीं, आधुनिक काल के पाश्चात्य विद्वानों ने संगीत की शक्ति को पहचान कर स्वर ब्रह्म को म्यूजिक थैरेपी के नाम से चिकित्सा शास्त्र से जोड़ा है। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध और 20 वीं सदी के प्रारंभ में यूरोप में संगीत उपचार की शुरुआत की गई और वहां मानसिक रोगियों को संगीत की लहरियों से ठीक किया जाने लगा। सन् 1926 से डिप्रेशन और टेंशन जनित रोगों के लिए म्यूजिक थेरेपी का सहारा लिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका से प्रभावित रोगियों के उपचार के लिए अमेरिका के कई वेटरन एडमिनिस्ट्रेशन हास्पिटल में म्यूजिक थेरेपी का सहारा लिया गया।

भारतीय संगीत की अलौकिक शक्ति

दि हीलिंग फोर्स ऑफ म्यूजिक के लेखक आर. मैक्लीन ने दावा किया है कि भारतीय संगीत दिव्य औषधि का काम कर तन, मन और मस्तिष्क में जागृति भर देता है। हमारा संगीत जगाने का काम करता है जबकि पश्चिम संगीत सुलाने का।

नाद ब्रह्म को मानने वाले भारत में जहां दीपक राग बुझे दीपक जला देता है, प्रेम की भावना में अभिवृद्धि करता है, वहीं श्रद्धा के उन भावों को जागृत करता है जिसकी तरंगें अंतरिक्ष में स्थित देव शक्तियों को आकर्षित करती हैं। हमारे मुल्क के मंत्र दृष्टाओं ने इसी तथ्य के मद्दे नजर गायत्री मंत्र जैसे अनेकों मंत्रों की रचना कर अलौकिक शक्तियों को जागृत किया है। यह भारत का गुप्त शास्त्र है जो श्रुति व स्मृतियों के जरिये आज हमारी धरोहर बन गया है। नादयोग साधना में शब्द ब्रह्म को जाग्रत कर दिव्य सिद्धियां प्राप्त की जाती हैं।

ध्वनि प्रदूषण के इस दौर में म्यूजिक थेरेपी को अगर पूरे तौर पर विकसित किया जाए तो यह भारत जैसे गरीब देशों में चमत्कार का काम करेगी। आज के संगीतज्ञों को अब मेडिकल कंपोजीशन तैयार करनी चाहिये। यही समय की मांग है। सन् 1985 में प्रकाशित शोध पत्र जरनल ऑफ म्यूजिक थेरेपी में मार्क राइजर और फलायट ने लिखा है - संगीत तनाव हार्मोन के रूप में जाना जाने वाले कार्टिसोल की मात्रा कम करता है। इसमें कमी आने से शरीर तनावमुक्त और शांत होता है। डॉ. जान डायमंड ने अपनी कृति ’ द लाइफ इनर्जी इन म्यूजिक‘ में उल्लेख किया है कि सुगम और शास्त्रीय संगीत से मानसिक और भावनात्मक विकार दूर होते हैं।

हृदय की औषधि है संगीत

बायोकेमिकल सिद्वांतों के अनुसार संगीत मानव शरीर क्रिया विज्ञान पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है। यह प्रभाव मस्तिष्क के सेरिब्रल कॉर्टेक्स और आटोनामिक नर्वस सिस्टम के माध्यम से पड़ता है। संगीत की लहरियां कान में प्रवेश करने के बाद इलेक्ट्रिकल नर्व इम्पल्स के रूप में तब्दील होकर न्यूरल नेटवर्किंग के माध्यम से सेरिब्रल कॉर्टक्स में पहुंचती हैं। स्वर लहरियों की यह यात्रा सब कॉर्टेक्स से होकर लिम्बिक सिस्टम और ऑटोमेरिक नर्वस सिस्टम से सारे शरीर में (प्रसारित) होती है।

न्यूरोसाइकोलाजिस्ट और संगीतज्ञ डाॅ. मेनप्रेड क्लिनीस के अनुसार संगीत ध्वनि न्यूरोपेप्टाइड्स और मेटाबोलिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है। इससे हृदय की मांसपेशियों की हरकतों में गुणात्मक परिवर्तन होता है। शास्त्रीय संगीत हृदय की सर्वश्रेष्ठ औषधि है।(स्वास्थ्य दर्पण)

राजेश तस्कीं

SCROLL FOR NEXT