हँसी एक सहज-स्वाभाविक क्रिया है लेकिन है एक अद्वितीय क्रिया। यह एक मूल प्रवृत्ति है जो केवल मानव में ही पाई जाती है। कहा गया है कि साहित्य, संगीत और कला से विहीन मनुष्य पशु के समान है, यह बात कुछ हद तक ठीक है लेकिन व्यावहारिक स्तर पर देखें तो जो व्यक्ति प्रकृति द्वारा मनुष्य को प्रदत्त इस अमूल्य उपहार ‘हँसी’ का अपने जीवन में उपयोग नहीं कर पाता वह सबसे बड़ा पशु है। मनुष्येतर प्राणियों में सिर्फ चिंपाजी ही एक ऐसा प्राणी है जो कुछ सीमा तक हँसने जैसी क्रिया कर सकता है अन्यथा पूरी सृष्टि में मनुष्य ही एकमात्रा प्राणी है जिसे प्रकृति ने यह अमूल्य निधि प्रदान की है। अतः हास्य रूपी इस अमूल्य निधि का भरपूर प्रयोग कीजिए और अपने मनुष्य होने का प्रमाण दीजिए।
हँसना एक संपूर्ण व्यायाम है जिससे शरीर की सभी नाड़ियां खुलती हैं तथा शरीर की थकावट दूर होकर ताज़गी उत्पन्न होती है। खुलकर हँसने से फेफड़ों, गले और मुँह की अच्छी कसरत हो जाती है। पेट एवं छाती के स्नायु मजबूत होते हैं। डायफ्राम मज़बूत होता है तथा इससे मुँह, गले तथा फेफड़ों संबंधी व्याधियों के उपचार में मदद मिलती है। हँसने से रक्त संचार की गति तीव्र होती है जिससे खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है। इस पूरी प्रक्रिया से चेहरे पर रौनक़ आ जाती है। जो जितना अधिक हँसता-हँसाता है उसका चेहरा उतना ही अधिक दमकता है। शरीर में जितनी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन का अवशोषण होता है उतनी ही अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है और जितनी अधिक ऊर्जा उत्पन्न होगी हम उतने ही अधिक स्वस्थ तथा रोग मुक्त होंगे। इस प्रकार हास्य में जीवन के उपचारक एवं पोषक तत्व विद्यमान हैं।
हास्य द्वारा हमारे शरीर की जीव-रासायनिक संरचना में परिवर्तन आता है। हँसने से तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोंस कार्टिसोल तथा एपिनप्राइन के स्तर में कमी आती है जिससे शरीर तनावमुक्त हो जाता है और तनाव मुक्ति का अर्थ है अच्छा स्वास्थ्य। इसके अतिरिक्त हँसने से शरीर में एंडोर्फिन नामक हार्मोन की मात्रा में वृद्धि होती है जो शरीर के लिए स्वाभाविक रूप से दर्द निवारक और रोग अवरोधक का काम करता है। कहने का तात्पर्य यह है कि हँसने से शरीर के लिए उपयोगी हार्मोन का उत्सर्जन प्रारंभ हो जाता है जो हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है इस प्रकार हँसना अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक और पर्याय है।
एक रिसर्च के अनुसार हँसने और ख़ुश रहने से टी. लिंफोसाइट्स अधिक क्रियाशील हो जाते हैं जिनसे उन प्राकृतिक सेलों के निर्माण में वृद्धि होती है जिन्हें किलर सेल कहते हैं। ये किलर सेल कैंसर जैसे घातक रोग पैदा करने वाले भयानक सेलों को विनष्ट करने में सक्षम होते हैं। इस प्रकार हँसने-हँसाने से भयानक रोगों से छुटकारा पाने में भी सहायता मिलती है।
(स्वास्थ्य दर्पण)सीताराम गुप्ता