प्रोस्टेट ग्रंथि पुरुषों में पाये जाने वाली अखरोट के आकार वाली ग्रंथि हैं। यह ग्रंथि मूत्राशय (Urinary Bladder) के निचे, मलाशय (Anus) के आगे और मूत्रमार्ग (Urethra) के चारो ओर स्थित होती हैं। इस ग्रंथि से निकलने वाला तरल पदार्थ वीर्य में शुक्राणु ले जाने में सहायता करता हैं। आयु के बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़़ना एक सामान्य बात हैं परंतु प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार सामान्य से अधिक बढ़ जाने पर मूत्रमार्ग में अवरोध उत्पन्न करता हैं। 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 50% व्यक्तिओं में प्रोस्टेट ग्रंथि में सूजन की समस्या होती हैं। 85 वर्ष के होते-होते इसका परिमाण 90% हो जाता है।
पेशाब करने में तकलीफ होना, बार-बार पेशाब जाना, एक बार में पूरा पेशाब न होना, पेशाब को रोक न पाना और जल्द पेशाब करने की इच्छा होना , रात को पेशाब करने के लिए बार-बार उठना, मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने से बार-बार पेशाब में संक्रमण होना या पथरी होना, बूंद-बूंद पेशाब होना, पेशाब बंद हो जाना या कभी-कभी पेशाब से खून भी आना , मूत्र संक्रमण के कारण किडनी मे संक्रमण होना।
( खानपान और परहेज करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य ले लें अपने मन से कुछ भी न लें )
उचित समय पर पचने वाला हल्का भोजन करें , सब्जियों में लौकी, तरोई, टिण्डा,परवल, गाजर, टमाटर( कम), पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई, धनिया पत्ती आदि का सेवन करें , दालों में मूंग व चने की दाल खाएं , फलों में सेब, पपीता, केला, नारंगी, संतरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, चीकू आदि का प्रयोग करें।
यह न खाएं :- अरहर, मलका, मसूर, मोठ, लोबिया, काबुली चने आदि का सेवन न करें, ज्यादा गुड़ का सेवन, लाल मिर्च, मिठाई, तेल, खटाई, अचार, मसाले।
बहुत ज्यादा मैथुन और योग, व्यायाम से परहेज करें ।
औसत से थोड़ा ज्यादा पानी पीयें। पेशाब करने से पहले पानी पीना चाहिये, सही अंडरवियर पहनें। अगर अंडरवियर काफी तंग रहेगी तो जननेन्द्रिय दबी रहेगी और साथ में गरम भी हो जाएगी जिससे दिक्कत हो सकती है, शराब और दूध वाली चाय तथा कॉफी का सेवन कम करें। यदि बहुत मन करे तो दिन में केवल एक कप पीना सही रहता है।
हमारे होम्योपैथिक विधा में प्रॉस्टेट ग्रंथि को बढ़ने से रोकने के लिए मरीज के लक्षणों के अनुसार बहुत सारी दवाइयां हैं। इन दवाइयों का सेवन करने से एक तो प्रोस्टेट ग्रंथि अत्यधिक बढ़ नहीं पाती है साथ ही साथ प्रोस्ट्रेट संबंधी बीमारी के होने की आशंका भी कम रहती है।
(स्वास्थ्य दर्पण) डॉ. रूप कुमार बनर्जी, होमियोपैथिक चिकित्सक