बाजू, टांग, उंगली, हाथ, पैर की हड्डी टूटने को फ्रैक्चर कहते हैं। हड्डी को जुड़ने में सामान्यतः तीन से छः माह तक लग जाते हैं। हड्डी जुड़ने के बाद अंग को पूरी तरह योग्य होने में कभी-कभी अधिक समय भी लग जाता है। फ्रैक्चर भी कई प्रकार के होते हैं:- हेयरलाइन फ्रैक्चर, मल्टीपल बोन्स फ्रैक्चर, एक ही हड्डी में कई जगह फ्रैक्चर होना आदि।
हेयरलाइन फ्रैक्चर तो आराम करने से और हल्का कच्चा प्लास्टर कराने से या गर्म पट्टी बांधने से भी 45 से 60 दिन तक ठीक हो जाता है। मल्टीपल बोन्स टूटने या एक ही हड्डी में कई जगह टूटने की स्थिति में प्लॉस्टर 2 माह से 3 माह तक भी लगाना पड़ सकता है। कभी कभी ऑपरेशन कर अंग के अंदर की हड्डी को जोड़ने के लिए नेल या प्लेट-स्क्रू का प्रयोग भी किया जाता है।
हड्डी टूटने पर या हड्डी देर से जुड़ने पर कई बार इलाज कराने के बावजूद और प्लॉस्टर लगवाने पर भी स्थिति पहले जैसी नहीं हो पाती। ऐसे में कई कारण हो सकते हैं:-
फ्रैक्चर होने पर कई बार हड्डी के टुकड़ों के बीच में मांस आ जाने पर हड्डी उचित रूप से नहीं जुड़ पाती है। ऐसे हालात होने पर ऑपरेशन करवाना पड़ सकता है।
फ्रैक्चर होने पर कई बार खुले घाव भी साथ ही हो जाते हैं या हड्डी कई स्थानों से टूट जाती है। ऐसी स्थिति में भी हड्डी जुड़ने में अधिक समय लगता है।
कई बार रोगी के शरीर में प्रोटीन, लवण और विटामिनों की कमी होने पर भी हड्डी जुड़ने में अधिक समय लगता है।
पैर की हड्डी, जांघ की हड्डी, गर्दन के पास की हड्डी, कलाई और पंजे की हड्डी कुछ मुश्किल से जुड़ती है क्योंकि इन अंगों की हड्डियों की बनावट ऐसी होती है जिनमें खून का दौरा कुछ कम होता है।
डायबिटिज होने पर, टी.बी. होने पर, हार्मोन्स अंसतुलन होने पर या वृद्धावस्था में भी हड्डियों के जुड़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
कभी कभी हड्डियों को ठीक बिठाकर प्लास्टर किया जाता है परन्तु किसी किसी केस में हड्डियां खिसक जाती हैं जो सही रूप से नहीं जुड़ पाती। ऐसी परिस्थिति में भी ऑपरेशन कर ठीक करने का प्रयास किया जाता है।
हड्डी टूटने पर हमेशा हड्डी रोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मालिश करवा कर हड्डी का सत्यानाश न करवायें। हड्डी रोग विशेषज्ञ से इलाज करवाते समय पूरी जानकारी लें कि क्या क्या दवा, विटामिन्स आदि लेने हैं और प्लॉस्टर कब तक रखना है। क्या सावधानियां लेनी हैं, इस बारे में बिना हिचक पूछें।
यदि आप डॉक्टर से संतुष्ट नहीं हैं तो किसी अन्य हड्डी विशेषज्ञ से अवश्य सलाह लें।
प्लॉस्टर वाले स्थान का पूरा ध्यान रखें और नियमित समय पर जांच करवाते रहें। थोड़ी सी लापरवाही आपके अंग को प्रभावित कर सकती है।
समय से पहले प्लॉस्टर काट देने से हड्डी मुड़ सकती है और कच्ची भी जुड़ सकती है।
मालिश, खींचतान और सिंकाई हड्डी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
फ्रैक्चर होने की स्थिति में मरीज़ को शीघ्र ही हड्डी विशेषज्ञ को दिखाएं। ऐसे में देरी नुकसान पहुंचा सकती है।
प्लास्टर लगने पर कभी भी पैंसिल या किसी नुकीली वस्तु से मत खुजलाएं। इसके अन्दर लगने पर इन्फेक्शन भी हो सकता है।
प्लास्टर को कभी स्वयं न काटें, न ही छोटा करें।
प्लास्टर को पानी से बचा कर रखें।
प्लास्टर के टूट जाने पर या चटक जाने पर तुरन्त डाक्टर से परामर्श करें। हड्डी खिसककर गलत भी जुड़ सकती है।
प्लास्टर लगवाने के बाद डॉक्टर से जानकारी ले लें कि प्लास्टर लगे अंग को कितना हिलाना डुलाना चाहिए, कितना काम उस अंग से लेना चाहिए और कितना वज़न उस अंग पर डालना चाहिए। उस अंग को कितने आराम की आवश्यकता है, इसकी भी पूरी जानकारी लें। अधिक हिलाने डुलाने से हड्डी देर से जुड़ सकती है और खिसक भी सकती है।
नीतू गुप्ता (स्वास्थ्य दर्पण)