बुढ़ापा जीवन का एक सच है। हम सबको एक दिन तो बूढ़ा होना ही है लेकिन बुढ़ापे के साथ जुड़ी है बीमारी और लाचारी। यदि आप बुढ़ापे में भी स्वस्थ रहना चाहते हैं तो बहुत जरूरी है कि आप पहले से ही अपनी सेहत की ओर ध्यान दें। यदि आप यह करें तो बुढ़ापा रुकेगा तो नहीं लेकिन वह यकीनन सेहतमंद बुढ़ापा हो सकता है। सैर करना सबसे जरूरी समझा गया है अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए। जो व्यक्ति रोज़ सैर करते हैं उनके शरीर में जंग नहीं लगता और उनके हाथ, पैर और टांगें जकड़ नहीं पातीं । वृद्ध लोगों को हल्के फुल्के व्यायाम अवश्य करने चाहिए।
पूरी दुनिया में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है। वृद्धों का स्वास्थ्य एक गंभीर समस्या है। इसका मुकाबला करने के लिए यह बहुत जरूरी है कि वृद्ध लोगों को स्वस्थ रहने की राह बतायी जाए ।
बुढ़ापे में तनाव, हृदय रोग, मधुमेह गठिया और मानसिक बीमारियां अधिक हो जाती हैं। इस आयु में मोतियाबिन्द इत्यादि भी अधिक हो जाता है। कई डॉक्टरों का कहना है कि बुढ़ापे में आपकी सेहत केवल चुस्त रहने से अचछी रह सकती है। बुढ़ापा कोई बीमारी नहीं है और हाय तौबा करने से बुढ़ापा केवल मुश्किल ही नहीं, पीड़ादायक भी हो जाता है।
स्वस्थ बुढ़ापे के लिए आपको 40 वर्ष की उम्र से ही ध्यान रखना चाहिये। सिगरेट, शराब न पीएं । ज्यादा तली चीजें न लें और फल और उबली सब्जियां अधिक लें। बुढ़ापे का सामना सभी को करना है और हम इसे रोक नहीं सकते। हम केवल इसका सामना करने के लिए तैयार रह सकते हैं। ये कुछ जरूरी बातें हैं जो आपके बुढ़ापे को सेहतमंद बनाने में सहायता करेंगी। हर बूढ़े व्यक्ति को सैर करनी चाहिये, सीढि़यां चढ़नी चाहिए और कोई भी हल्का व्यायाम करना चाहिए।
घर के किसी भी हल्के फुलके काम में सहायता करनी चाहिए जैसे टेबल लगाना व उठाना, थोड़ी डस्टिंग कर देना या बच्चों को बस स्टाप से लाना या छोड़ देना। कोई भी काम करने से व्यक्ति छोटा नहीं हो जाता। यदि आप नित्य कोई भी काम अपनी सेहत और उम्र के हिसाब से करें तो आप मानसिक तौर से भी व्यस्त रहने के कारण स्वस्थ रहेंगे।
आपको भोजन का खास ध्यान रखना पडे़गा । ज्यादा नमक, चीनी और घी युक्त भोजन न लें। अपना वज़न कम करें। इससे आप चुस्त और फुर्तीले बने रहेंगे।
कोई भी संस्था जो पूजा पाठ करती हो या समाज सेवा का कार्य करती हो, उसमें भरती हो जाएं और नित्य वहां हाथ बंटाएं।
इसके अलावा इन बातों पर भी ध्यान दें
अपने बुढ़ापे के लिए पैसा अवश्य जोड़ कर रखें । इससे आपको लाचारी का अहसास नहीं होगा। यह बहुत जरूरी है कि आप पैसों के लिए और अपनी जरूरी चीजों के लिए अपने पास पैसा रखें । इस बात का मानसिक सन्तुलन से गहरा रिश्ता है। चिड़चिड़ापन और नुक्स निकालने की आदत छोड़ दें। आप अपना जीवन अपने ढंग से जी चुके हैं। अब अपने बच्चों को उनके ढंग से जीने दें। बुढ़ापे में सबसे बड़ा दुःख है अकेलापन। आप यह अकेलापन तभी दूर कर सकते हैं यदि आप इन सब बातों को ध्यान रखें और अपनी ओर अपने परिवार को आकर्षित करें जिससे न उन्हें और न आपको बुढ़ापे की मजबूरियों का अहसास हो। अम्बिका(स्वास्थ्य दर्पण)