गंभीर समस्या भी बन जाता है सिरदर्द सांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
संजीवनी

गंभीर समस्या भी बन जाता है सिरदर्द

सिरदर्द

सिरदर्द वैसे तो बहुत ही साधारण माना जाने वाला दर्द है जिसका शिकार अक्सर लोग होते रहते हैं। कभी अधिक ठंड में बाहर निकलने से ठंडी हवा लगने से सिर दर्द होता है तो कभी गर्मी में अधिक धूप में बाहर निकलने से इसके आगोश में आना पड़ता है।

सिरदर्द वैसे देखने में आम समस्या है पर कभी-कभी यह गंभीर समस्या भी बन जाता है। सिरदर्द में मस्तिष्क के चारों ओर की तंत्रिकाएं और मांसपेशियां दबाव में आ जाती हैं। इन पर कितना दबाव है, उस पर सिरदर्द की तीव्रता निर्भर करती है। हल्का सिरदर्द मस्तिष्क की तंत्रिकाओं और मांसपेशियों से आंखों पर तनाव भी बनाता है।

सिरदर्द उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, तनाव, कुपोषण, भूख लगने पर खाना न मिलने की स्थिति में, जुकाम, गला खराब होने पर प्राय: सिरदर्द हो सकता है। सिरदर्द के अनेकों कारण हैं। हमें इन कारणों को पहचानकर सिरदर्द का इलाज करना चाहिए ताकि हम सिरदर्द में लाभ पा सकें और किसी बड़ी समस्या से बचाव कर सकें।

तनाव वाला सिरदर्द

जब कभी मानसिक रूप से कोई तनाव हो तो गर्दन और सिर की मांसपेशियों में खिंचाव होता हैं और सिर में दर्द होता है। जिसका अनुभव अधिकतर लोगों को होता है। ऐसी स्थिति में सिरदर्द की गोली ले लेने और थोड़ा आराम करने के बाद सिरदर्द में राहत मिलती है। यह सिरदर्द अस्थाई रुप से होता है।

साइनस का सिरदर्द

जिन लोगों को साइनस की तकलीफ होती है, उन्हें अक्सर इस दर्द से गुजरना पड़ता है। इसमें चेहरे के आस पास विभिन्न हिस्सों में दर्द बना रहता है जिससे सिर में भी दर्द का आभास होता हैं। साइनस के सिरदर्द में नाक, चेहरे, सिर में भारीपन, नजला आदि बराबर बना रहता है। साइनस के सिरदर्द में गर्म पानी की भाप लेने से नाक और नाक के आस पास के भागों में गर्म सिंकाई से लाभ पहुंचता है। अजवायन को तवे पर गर्म कर एक रुमाल में रख कर भी नाक और आसपास के भागों पर सिकाई कर सकते हैं। नाक खुल जाने के बाद राहत मिलती है।

तेज सिरदर्द

तेज सिरदर्द अधिक समय तक परेशान करता है। यह मस्तिष्क के अगले भाग में, नाक के बीच व आंखों के आस पास के हिस्से को दर्द से प्रभावित करता है। ऐसा सिरदर्द 8 से 12 घंटे तक रहता है। इस सिरदर्द को कलस्टर का सिरदर्द भी कहते हैं। यह तीव्रता लिए होता है। इस सिरदर्द में लोग बहुत परेशान होते हैं।

सिरदर्द होने पर अगर हम उसके मूल कारणों को जानने का प्रयास करें तो लाभ अवश्य और शीघ्र मिलेगा। सिरदर्द होने पर बार बार दर्दनिवारक गोलियां लेना भी ठीक नहीं। इससे अन्य साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

सिरदर्द के मूल कारणों को जानने में आप डॅाक्टर से मदद लें और उनकी निगरानी में टेस्ट करवाएं। सिर, नाक और उनसे संबंधित अंगों की जांच आवश्यक है। एक्सरे, सीटी स्कैन, ई.सी.जी., आंखों की जांच और खून की जांच आदि डाॅक्टर के परामर्श अनुसार कराएं और मूल कारण का पता लगाएं।

कभी-कभी बार-बार और लगातार होने वाला सिरदर्द किसी बड़े रोग का संकेत भी हो सकता है जैसे मस्तिष्क टयूमर, रक्त वाहिकाओं में अवरोध आदि।

कौन सा सिरदर्द खतरनाक हो सकता है

- अचानक सिरदर्द होने लगे और कई दिन तक यह चले तो डॅाक्टरी परामर्श की आवश्यकता है। प्रात: उठते ही सिर का भारीपन काफी देर कई दिनों तक बना रहे तो उच्च रक्तचाप या मस्तिष्क ट्यूमर के कारण भी हो सकता हैं। डाॅक्टर से जांच करवाएं।

- अगर सिरदर्द काफी हो, उसके साथ उल्टी आए या दिल मिचलाए, बात करना अच्छा न लगे, आवाज में बदलाव आए, तब भी चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

- कभी कभी सिरदर्द के साथ चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, उल्टी का मन होना, यह अक्सर उन लोगों को होता है जिन्हें कभी सिर पर चोट लगी हो, तब भी डाॅक्टर से परामर्श करें।

- बदन में दर्द, बुखार होना, साथ सिरदर्द होना, यह वायरल के कारण हो सकता है। डॉक्टर से वायरल इन्फेक्शन की दवा लें।

खांसी, जुकाम वाले सिरदर्द के लिए भाप उचित उपचार है। फिर भी फर्क न पड़े तो डॉक्टर से परामर्श करें। हल्के सिरदर्द में मालिश, अंधेरे कमरे में माथे पर बाम लगा कर आराम करने से और कुछ एक्युप्रेशर प्वाइंटस पर दबाव तब दें जब आप अच्छी तरह से उसकी जानकारी रखते हैं, या परिवार में जिस सदस्य से दबवाएं, उन्हें पूरी जानकारी हो। नीतू गुप्ता (स्वास्थ्य दर्पण)

SCROLL FOR NEXT