कोलकाता : शिक्षक दिवस के अवसर पर मणिपाल हॉस्पिटल्स कोलकाता ने ‘स्टोरी ऑफ द शेपर्स’ के तहत ऐसे शिक्षक को सम्मानित किया, जिन्होंने बीमारी का पता चलने के बाद उपचार और संघर्ष के बीच अपनी सामान्य जिंदगी में वापसी की मिसाल पेश की। यह कहानी है हुगली स्थित विद्यासागर कॉलेज के कॉमर्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निबिर गोस्वामी की।
डॉ. गोस्वामी की शुरुआती शिक्षा बर्दवान जिले के एक सुदूर गांव में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वह कोलकाता आए और प्रतिष्ठित गोयनका कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की और साथ ही कॉस्ट अकाउंटेंसी की प्रोफेशनल डिग्री भी पूरी की।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डंकन ग्रुप में वित्तीय पेशेवर के रूप में की। करीब छह वर्ष तक कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने के बाद अध्यापन के प्रति अपने जुनून के चलते उन्होंने शिक्षण क्षेत्र को अपना करियर बनाया और विद्यासागर कॉलेज, हुगली में प्रोफेसर के रूप में कार्यभार संभाला। बाद में उन्होंने बर्दवान विश्वविद्यालय से पीएचडी की। पिछले 28 वर्षों से वह विद्यासागर कॉलेज से जुड़े हैं और वर्तमान में कॉमर्स विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह कलकत्ता विश्वविद्यालय के अधीन एनएनडीसी कॉलेज तथा श्री अग्रसेन कॉलेज के स्नातकोत्तर विभाग में विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं।
अध्यापन के साथ-साथ डॉ. गोस्वामी को वक्तृत्व कला, चित्रकला और गिटार बजाने का भी शौक है।
मई में सामने आई बीमारी, जुलाई में सफल सर्जरी
मई 2026 में नियमित जांच के दौरान उनका प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन स्तर बढ़ा हुआ पाया गया। इसके बाद विस्तृत जांच में प्रोस्टेट में कैंसर की पुष्टि हुई। मणिपाल हॉस्पिटल, ढाकुरिया के कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एवं यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. बास्तब घोष ने करीब एक महीने की हार्मोन थेरेपी के बाद लैप्रोस्कोपिक रैडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी की सलाह दी।
1 जुलाई 2026 को उनकी सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सर्जरी के लगभग 10 दिन बाद कैथेटर हटाए जाने के साथ ही उन्होंने पेशाब पर नियंत्रण हासिल कर लिया। जुलाई के अंत तक वह अपने सामान्य जीवन में लौट आए और दोबारा काम शुरू कर दिया। आज वह खुद को पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य महसूस कर रहे हैं।
डॉ. निबिर गोस्वामी ने कहा, “मास्टर्स की डिग्री के बाद मुझे एक बार फिर एक नया सर्टिफिकेट मिला, जब डॉ. घोष ने कहा कि आप ‘डिस्टिंक्शन के साथ क्वालिफाई’ हुए हैं। मैं डॉ. बास्तब घोष और मणिपाल हॉस्पिटल ढाकुरिया की पूरी सपोर्ट टीम के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं, जिन्होंने एक बार फिर मेरी ‘लाइफ ऑन’ कर दी।”
जल्दी पहचान और लगातार निगरानी जरूरी: डॉ. घोष
डॉ. बास्तब घोष ने कहा कि प्रोस्टेट कैंसर के उपचार के बाद नियमित सर्विलांस और निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बीमारी की जल्दी पहचान, मरीज की जरूरत के अनुसार उपचार और लगातार मॉनिटरिंग बेहतर रिकवरी की कुंजी है।
उन्होंने कहा, “रैडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी के बाद पेशाब पर नियंत्रण खोना मरीजों के लिए एक वास्तविक चिंता होती है। मैं बेहद खुश हूं कि श्री निबिर एक फाइटर हैं और एक महीने के भीतर अपने सामान्य जीवन में लौट आए। इस शिक्षक दिवस पर मैं उन्हें और देश के सभी शिक्षकों को सम्मानपूर्वक नमन करता हूं।”
डॉ. निबिर गोस्वामी की यह यात्रा न केवल कैंसर के खिलाफ उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि समय पर बीमारी की पहचान, सही उपचार और सकारात्मक सोच के साथ कठिन परिस्थितियों से उबरकर सामान्य जीवन की ओर लौटा जा सकता है।