स्वाद के साथ सेहत पर भी ध्यान दें सांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
संजीवनी

स्वाद के साथ सेहत पर भी ध्यान दें

आहार और सेहत

हर समय कुछ न कुछ चुगते रहना या चटर-पटर खाना अपने स्वास्थ्य के साथ

खिलवाड़ करना है। इसकी तुलना में आवश्यक एवं पौष्टिक आहार उपयोगी एवं

लाभकारी है। वैसे भी कम खाकर या भूखे रहकर बहुत कम लोग मरते हैं, तुलना में

अधिक खा कर लोग ज्यादा बीमार पड़ते हैं एवं ज्यादा मरते हैं।

महत्त्व -

कई लोग तो भोजन के रंग, स्वाद एवं सुगंध से वशीभूत होकर कई बार अधिकाधिक

खाने लगते हैं। यह स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। जीवित रहने के लिए जितना सांस

लेना जरूरी है, उतना ही भोजन करना जरूरी है सांस में स्वच्छ हवा का महत्व है तो

भोजन में पौष्टिक आहार का।

दबाव -

कभी-कभी हम दूसरों के आग्रह पर दबाव से प्रभावित होकर आवश्यकता से अधिक खाने

लगते हैं। कब, कितना और कैसे खाएं, इस पर ध्यान देना आवश्यक है। स्वाद के

चक्कर में न पड़कर शरीर और स्वास्थ्य के लिए खाएं।

खाने की आदत-

कभी-कभी बोरियत या खालीपन दूर करने के लिए लोग कुछ न कुछ खाते रहते हैं।

पार्टी लेने-देने के फेर में अधिक खाने लगते हैं।

चिंता, क्रोध व निराशा से बचने के लिए लोग अधिक खाने लगते हैं।

तीज, त्यौहारों व सामाजिक समारोह में आवश्यकता से अधिक खाने लगते हैं।

चाय या अन्य कोई पेय पीना पिलाना भी ठीक नहीं है।

उपचार-

बिना भूख लगे कभी न खाएं।

दिन में दो बार मुख्य आहार लें।

रात्रि के समय का भोजन दिन की तुलना में कम हो।

प्यास लगने पर पानी पिएं, भोजन से पूर्ति न करें।

अधिक खाने से बचने के लिये भोजन धीरे-धीरे करें। ग्रास छोटा-छोटा करें।

भोजन में सदैव शक्कर व तेल घी कम हो।

दैनिक व्यायाम करें। वजन, स्वास्थ्य व शरीर पर ध्यान दें।

टीवी देखते या कंप्यूटर पर बैठे खाने की आदत को टालें।

भूख बढ़ाने एवं अधिक खाने के कारणों से बचें, चटनी, अचार, पापड़ का कम उपयोग

करें।

बाजार की एवं डिब्बाबंद वस्तुएं न खाएं। सीतेश कुमार द्विवेदी(स्वास्थ्य दर्पण)

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